राजधानी जयपुर की सड़कों पर नहीं चलेंगे 8 साल पुराने वाहन!

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जयपुर। दुनियाभर में एक ओर जहां ग्लोगल वार्मिंग चिंता का विषय बनती जा रही है, वहीं इस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रदूषण पर काबे पाने के लिए भी विश्वभर में कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के बीच जहां देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक एवं प्रदूषण को कम करने के लिए 'सम-विषय' व्यवस्था लागू किए जाने की कवायद की जा रही है।

राष्ट्रीय राजधानी के बाद अब प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी बढ़ते हुए यातायात दबाव एवं प्रदूषण को देखते हुए परिवहन विभाग की ओर से विशेष कवायद किए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत 8 साल से पुराने वाहनों का संचालन बंद किया जाएगा, जिससे अब पुराने एवं प्रदूषण फैलाने वाले वाहन जयपुर की सड़कों पर नहीं चल सकेंगे।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाद अब प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी परिवहन विभाग की ओर से शहर में दिन-ब-दिन बढ़ते हुए यातायात के दबाव एवं खटारा वाहनों से निकलने वाले धुएं से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए विशेष कवायद की जाएगी।

इस दिशा में परिवहन विभाग अब शहर की सड़कों पर पुराने-खटारा वाहनों का संचालन बंद करेगा, जिससे अब पुराने एवं खटारा वाहन शहर की सड़कों पर नजर नहीं आएंगे। इन वाहनों में लोडिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहन शामिल होंगे, जिनका संचालन परिवहन विभाग की ओर से बंद कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार इसके लिए परिवहन विभाग जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरूआत में 10 साल से पुराने वाहनों का संचालन बंद कराएगा, जिसे बाद में 8 साल तक कर दिया जाएगा। राजधानी जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किए जाने वाले इस प्रयोग के सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

परिवहन मंत्री यूनुस खान का कहना है कि, 'फिलहाल राज्य में 15 साल पुराने लोडिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहनों के संचालन पर पाबंदी है। शुरूआत में इसे प्रायोगिक तौर पर 10 साल पुराने वाहनों के लिए लागू किया जाएगा और बाद में 8 साल तक लाया जाएगा। इस दिशा में सभी तरह की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है और अब जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।'

निजी वाहनों पर विचार बाद में

वाहनों से निकलने वाले धुएं से फैलने वाले प्रदूषण को देखते हुए जहां 8 साल पुराने वाहनों का संचालन बंद कराया जाएगा, जिनमें अभी चौपहिया वाहन शामिल होंगे। इनमें भी व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन शामिल होंगे, जो लोडिंग एवं गुड्स वाहन, निजी बसें, ट्रांसपोर्टेशन व्हीकल्स एवं पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुडे वाहन होंगे। वहीं दूसरी ओर इस श्रेणी में कार एवं दुपहिया वाहनों को शामिल नहीं किया जाएगा। इनके लिए पहले से ही 15 साल की अवधि तय की हुई है। फिर भी संभावना जताई जा रही है कि, बाद में निजी वाहन कार एवं दुपहिया वाहनों को भी इस सूची में शामिल किए जाने के बारे में भी विचार किया जा सकता है।

एक समान कलर और ड्रेस कोड होगा लागू

जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग की ओर से की जा रही इस कवायद के तहत जहां लोडिंग एवं पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े 8 साल पुराने वाहनों का संचालन बंद कराया जाएगा। वहीं शहर के यातायात को सुव्यवस्थित एवं बेहतर बनाने की दिशा में भी यात्रीभार ढोने वाले ऑटो, मिनी बसें और लो- लोर बसों का कलर एकसमान होगा। साथ ही साथ ही इन वाहनों को चलाने वाले ड्राइवरों के लिए ड्रेस कोड भी सख्ती से लागू होगा।

इनका कहना है...

'इस बारे में फिलहाल हमें किसी भी तरह के कोई सरकारी आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। यदि सरकार की ओर से कोई आदेश आते हैं, तो उसके अनुसार ही कार्यवाही की जाएगी।'
- वी पी सिंह, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी

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