भ्रूण लिंग परीक्षण की सूचना देने पर मिलेगा 2 लाख का पुरस्कार

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जयपुर। प्रदेश में प्रसव पूर्व एवं उसके बाद गर्भस्थ शिशु के लिंग जाचं प्रतिषेध के लिए लागू पीसीपीएनडीटी एक्ट-1994 के तहत राज्यस्तरीय कंट्रोल रूम एवं टोल फ्री नंबर 104 पर आमजन अपंजीकृत सोनोग्राफी मशीन, भ्रूण लिंग के ईच्छुक, इसके प्रयास करने वाले अथवा इसमें किसी भी रूप से सहयोग करने वालों के संबंध में सूचना देने वालों को राज्य सरकार की ओर से मुखबिर योजना के तहत दो लाख रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा। ख़ास बात ये है कि इसमें सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं विशिष्ट सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के अध्यक्ष नवीन जैन ने बताया कि 104 टोल फ्री नम्बर पर प्राप्त सूचनाओं की सत्यता जांच कर त्वरित कार्यवाही की जायेगी एवं सूचनादाता को मुखबिर पुरस्कार दिये जायेंगे। उन्होंने बतयाा कि भ्रूण लिंग जांच में लिप्त व्यक्तियों को रंगेहाथों पकड़ने के लिए मुखबिर योजना चलाई गई है एवं इसके अंतर्गत कुल 2 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि कुल ईनामी राशि का 40 प्रतिशत को मुखबिर को, 40 प्रतिशत डिकाॅय में सहयोगी गर्भवती महिला को एवं शेष 20 प्रतिशत ईनामी राशि गर्भवती के सहयोगी को दिया जाने का प्रावधान भी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2015 में 4 डिकाॅय ऑपरेशन की कार्यवाही की गई है। 

जैन ने बताया कि चिकित्सा विभाग द्वारा की प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम की पालना पूरी सतर्कता एवं गंभीरता से सुनिश्चित की जा रही है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राज्यस्तर पर राज्य सलाहकार समिति व समुचित समुचित प्राधिकारी समिति, जिलास्तर पर जिला कलक्टरों की अध्यक्षता में जिला समुचित प्राधिकृत समिति एवं उपखंड स्तर पर भी उपखंड प्राधिकृत समितियां प्रभावीरूप से कार्यरत हैं।

विषिष्ट सचिव ने बताया कि सिविल रिट याचिका संख्या 3270/2012 एस.के. गुप्ता बनाम युनियन आॅफ इंडिया व अन्य के प्रकरण में उच्च न्यायालय, राजस्थान जयपुर पीठ के 27 जुलाई 2015 को पारित निर्देशों के अनुसार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी संबंधित पक्षकारों जैसे सोनोग्राफी केन्द्र संचालक, मशीन निर्माता/विक्रेता कम्पनी, सभी समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी, जिला नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी व जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक को माननीय आदेशों की पालना पूरी सतर्कता एवं गंभीरता से करने को समय-समय पर आदेशित किया गया है।

उन्होंने बताया अधिनियम की प्रदेश में प्रभावी क्रियान्विती के लिए संबंधित पक्षकारों के साथ आवश्यक बैठकें आयोजित की जा रही है एवं आमजन को विभिन्न प्रचार-प्रसार माध्यमों के जरिये जानकारियां दी जा रही हैं।

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