सातवें वेतन आयोग के खिलाफ जयपुर में जुटे कई श्रमिक संगठन, 2 सितंबर को करेंगे 'हल्ला बोल'

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जयपुर। हाल ही में लागू किए गए सातवें वेतन आयोग को लेकर राजधानी जयपुर में राज्य एवं केन्द्रीय स्तर के कई श्रमिक संगठन एक साथ एक मंच पर आए। जयपुर में आयोजित किए गए इस संयुक्त प्रदेश सम्मेलन में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू और आर सीटू समेत कई श्रमिक एवं कर्मचारी संगठनों ने राज्य एवं केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर हल्ला बोला।

राजस्थान के श्रमिकों एवं कर्मचारियों के इस संयुक्त प्रदेश सम्मेलन में केन्द्रीय श्रम संगठनों और बैंक, बीमा, रक्षा, रेलवे, दूरसंचार, सड़क परिवहन, बिजली, केन्द्र एवं राज्य सरकारों तथा अन्य सेवा प्रतिष्ठानों के सभी अखिल भारतीय कर्मचारी महासंघों के 30 मार्च को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मलेन में की गई घोषणाओं को प्रदेश में पूरी ताकत के साथ लागू कर 2 सितंबर को अखिल भारतीय आम हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने केन्द्र की मोदी सरकार के साथ ही राज्य सरकार पर भी जमकर हल्ला बोला। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की वसुंधरा सरकार, जिसे केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपनी नीतियों को लागू करने की प्रयोगशाला बना रखा है, उसके द्वारा सबसे पहले देशी विदेशी पूंजी निवेश और औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है, जो श्रमिक एवं कर्मचारी वर्ग के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

सम्मेलन में कहा गया कि दोनों सरकारें तेजी के साथ श्रमिक, किसान, कर्मचारी एवं जनविरोधी नीतियां लागू करने पर आमादा है। प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का निजीकरण कर गला घौंटाने का काम किया जा रहा है। इनमें रोडवेज, बिजली, जलदाय, खनिज, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जनोपयोगी एवं बुनियादी सुविधाएं भी निजीकरण की भेंट चढ़ती जा रही है।

हाल ही में लागू किए गए सांतवें वेतन आयोग को लेकर भी सम्मेलन में मुद्दा उठाया गया कि, इस पे कमीशन में श्रमिक एवं कर्मचारी वर्ग के हितों को नजरअंदाज किया गया है। वहीं उच्च अधिकारी वर्ग को लाभांवित किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में विभिन्न दरों को लेकर की गई गणना जुलाई 2015 के आधार पर की गई है, जो उचित नहीं है।

राज्य की वसुंधरा सरकार पर निशाना साधते हुए वक्ताओं ने कहा कि, राज्य सरकार कई जनप्रतिनिधियों एवं श्रम संगठनों की ओर से किए जा रहे कड़े विरोध के बावजूद बिजली उत्पादन और वितरण का काम निजी कम्पनियों को सौंप रही है। इससे श्रमिको में उपजे भारी विरोध व आक्रोश को दबाने के लिए राजस्थान अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून के तहत बिजलर कंपनियों में हड़ताल पर पाबंदी की अवधि को नवम्बर 2016 तक बढ़ा दिया गया।

इसके अतिरिक्त अन्य कई मुद्दों को लेकर केन्द्र एव राज्य सरकार की ओर से अपनाई जा रही नीतियों के विरोध में संयुक्त प्रदेश सम्मेलन में राजस्थान के अलग अलग क्षेत्रों में कार्य करने वाले सभी श्रम संगठनों और कर्मचारी संगठनों से 2 सितम्बर को अखिल भारतीय आम हड़ताल को प्रदेश में व्यापक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया गया।

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