रोजगार पर संकट के चलते अपने भविष्य को लेकर श्रमिक तनाव में

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जयपुर। भिवाड़ी के नजदीक टपूकड़ा स्थित होंडा मोटरसाइकिल एण्ड स्कूटर इण्डिया लिमिटेड के प्लांट में पिछले काफी दिनों से कम्पनी मैनेजमेंट एवं मजदूरों के बीच चल रही कशमकश के कारण अघोषित तालाबंदी के चलते इस प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के लिए परेशानियां बढ़ती जा रही है। मजदूरों का कहना है कि उनके साथ अपनाई जा रही दमनकारी नीति का विरोध करने तक के लिए भी प्रशासन उन्हें परमिशन नहीं दे रहा है।

श्रमिकों का आरोप है कि कम्पनी में श्रमिकों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और ठेकेदारी प्रथा चला रखी है। मजदूरों के हितों का शोषण किया जा रहा है, जिसके चलते इसके विरोध में आवाज उठाने के लिए हमने यूनियन का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पिछले करीब छह महीने पहले अप्लाई किया था, लेकिन अभी तक भी हमारी यूनियन का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है।

श्रमिकों का कहना है कि कंपनी हमारी यूनियन का रजिस्ट्रेशन नहीं होने देना चाहती है, जिसके चलते कम्पनी ने यूनियन के रजिस्ट्रेशन पर स्टे लगवा दिया है, जिससे मजदूर परेशान है। इसके बावजूद भी हमारे साथ हुए अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी हमें विरोध-प्रदर्शन करने तक की भी अनुमति नहीं दी जा रही है। हम 18 मार्च को जयपुर में विधानसभा के सामने विरोध-प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन इसके लिए भी प्रशासन ने हमें अनुमति देने से मना कर दिया है। ऐसे में हमें अनुमति नहीं मिलती है, तो हम बिना अनुमति के प्रदर्शन कर अपनी गिरफ्तारियां देने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

श्रमिकों की यूनियन होन्डा मोटरसाइकिल एण्ड स्कूटर 2-F कामगार के महासचिव सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि, "श्रमिकों मांग है कि 16 फरवरी को टपूकड़ा के होन्डा मोटरसाइकिल एण्ड स्कूटर कम्पनी में हुये श्रमिकों पर लाठीचार्ज व पुलिसिया दमन की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए। श्रमिकों पर लगे फर्जी मुकदमों को वापिस लिया जाए। निलंबित व बर्खास्त श्रमिकों को तुरन्त काम पर लिया जाए। श्रमिकों को शांतिपूर्ण धरने के लिये होन्डा के पास जगह की अनुमति दी जावे। इसके अतिरिक्त श्रमिक यूनियन प्रक्रिया में कंपनी प्रबंधन का हस्तक्षेप नहीं करे।"

साथ ही यूनियन में शामिल दिलीप राठौड़ ने कहा कि, हम किसी भी प्रकार से हड़ताल के पक्ष में नहीं है, लेकिन कंपनी द्वारा हमारे साथ अपनाई जा रही दमनकारी नीति के खिलाफ बोलने के लिए हमें मौका दिया जाए और हमारी बात सुनने के  उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए कोई समाधान ढूंढना चाहते हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन हमसे बात करने तक के लिए भी राजी नहीं है। इसलिए हम आंदोलन के राह पर चलने के लिए मजबूर हैं।

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