केंद्र सरकार ने देश के 58 जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी

नई दिल्ली । देशभर मे डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के 20  जिलो सहित देश के 58 जिलों में मेडिकल कॉलेजों ...

नई दिल्ली । देशभर मे डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के 20  जिलो सहित देश के 58 जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी प्रदान कर दी है। । दरअसल, जिला अस्पतालों को ही अपग्रेड करके नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाएंगे। केंद्र एवं राज्यों की आर्थिक मदद से इनकी स्थापना होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हमने सभी राज्यों से जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। राज्यों से आए प्रस्तावों की जांच के बाद 58 जिला अस्पतालों को मेडिकल कालेज में अपग्रेड करने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक कालेज पर 189 करोड़ रुपये का खर्च आएगा जिसमें केंद्र की हिस्सेदार 80 फीसदी और बाकी 20 फीसदी राज्यों की होगी। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 20 जिला अस्पतालों को अपग्रेड किया जाएगा। यदि अगले सत्र से इन अस्पतालों में मेडिकल कालेज शुरू होते हैं तो इससे तकरीबन पांच हजार मेडिकल सीटों का इजाफा होगा।

नड्डा ने कहा कि हमारे देश में करीब साढ़े सात हजार डॉक्टरों की कमी है। गांवों में यह स्थिति और भी चिंताजनक है। गांवों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार मेडिकल काउंसिल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से बातचीत कर रही है।
आईएमए के साथ मिलकर सरकार चलो गांव की ओर अभियान चलाएगी। इस अभियान में डॉक्टरों को गांवों में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के तीसरी तिमाही के बजट में छह हजार करोड़ रुपये कटौती होने पर उन्होंने कहा कि यह राशि खर्च नहीं हुई थी इसलिए वित्त मंत्रालय ने इसमें कटौती की। लेकिन इससे स्वास्थ्य कार्यक्रम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस घटना के बाद मंत्रालय उपलब्ध बजट को तय समय में खर्च करने की रणनीति पर कार्य कर रहा है ताकि भविष्य में बजट खर्च नहीं होने पाने के कारण कटौती की नौबत नहीं आए।

नड्डा ने कहा कि उन्होंने विभिन्न विभागों के कार्य निष्पादन की समीक्षा की है। यह पाया है कि अभी भी बजट समयबद्ध तरीके से खर्च नहीं हो पा रहा है। दरअसल, बजट स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए उतनी बड़ी समस्या नहीं है जितना उसका तय समय में सही इस्तेमाल। इसलिए मंत्रालय ज्यादा स्वास्थ्य पर निवेश बढ़ाने के साथ-साथ उसके समुचित इस्तेमाल पर भी अपना ध्यान केंद्रीत कर रहा है।
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