नेताजी संबंधी फाइलों मामले में एनएसी की सफाई

कोलकाता। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने स्पष्ट किया है कि उसके अध्यक्ष की नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लापता होने के संबंध में जारी रहस्य से सं...

कोलकाता। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने स्पष्ट किया है कि उसके अध्यक्ष की नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लापता होने के संबंध में जारी रहस्य से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक किए जाने के मामले में कोई भूमिका नहीं है।

परिषद के अध्यक्ष के निजी सचिव धीरज श्रीवास्तव ने एक पत्र में कोलकाता स्थित एक स्वयंसेवी संगठन इंडिया स्माइल द्वारा भेजे एक कानूनी नोटिस के जवाब में कहा कि मैं यह बताना चाहता हूं कि इस मामले से राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष का कोई सरोकार नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिषद को एक कानूनी नोटिस भेजकर मांग की है कि नेताजी के लापता होने को लेकर जारी रहस्य के समाधान के लिए इस संबंध में अति गोपनीय समेत सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इन लोगों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष एक जनहित याचिका भी दायर की है।

इस याचिका के गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ के सामने रखे जाने की उम्मीद है। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने नेताजी के लापता होने के संबंध में अपने पास रखे कुछ दस्तावेजों के संबंध में आंकड़ा जारी करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि इस खुलासे से भारत के अन्य देशों के साथ ताल्लुकात खराब हो सकते हैं। याचिका में इस बात की भी न्यायिक समीक्षा करने की मांग की गई है कि क्या जनहित में इन दस्तावेजों को गोपनीय रखा जाना ही श्रेयस्कर होगा।

गौरतलब है कि ब्रिटिश शासकों द्वारा नेताजी को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया था लेकिन वे 1941 में नजरबंदी से भाग गए और आजादी की लड़ाई के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की मुहिम में लग गए। जापान की मदद से इंडियन नेशनल आर्मी का गठन करने के बाद नेताजी 1945 में लापता हो गए थे।

उन्हें अंतिम बार बैंकाक हवाई अड्डे पर 17 अगस्त 1945 को देखा गया था। मुखर्जी आयोग ने इस राय को खारिज कर दिया था कि 18 अगस्त 1945 को नेताजी का ताइवान में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था।


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