चैक करें, नए चैक में क्या है नया
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 1 जनवरी 2014 से बैंकों से नई चेक बुक की व्यवस्था लागू करने को कहा है। ऐसे में कस्टमरों को नए चेक के...
https://khabarrn1.blogspot.com/2013/12/check-out-that-what-is-new-in-new-cheque.html
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 1 जनवरी 2014 से बैंकों से नई चेक बुक की व्यवस्था लागू करने को कहा है। ऐसे में कस्टमरों को नए चेक के बारे में जागरूक हो जाना चाहिए। नए चेक में क्या खास बातें हैं और आखिर आरबीआई इसे क्यों लागू करना चाहता है? इससे कस्टमर्स को कितना फायदा होगा, ऐसी तमाम विषयों पर कुछ ख़ास बातें :
हालांकि आरबीआई नए साल के पहले दिन से नए चेक की व्यवस्था लागू करना चाहता है, लेकिन बैंकों के बड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंकिंग शाखाओं में बेहद आधुनिक टेक्नॉलजी है, वहां नए चेक बुक जारी करने और उसे लागू करने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन जिन शाखाओं में ऐसा नहीं है, वहां पर इसे लागू करने में कुछ वक्त लग सकता है। इसके लिए आरबीआई ने उनको छूट दी है।
बैंकिंग सेक्टर के एक्सपर्ट के. के. मदान के अनुसार चेकों में वॉटर मार्क होने से इसकी फोटोकॉपी बनाना मुश्किल होगा। साथ ही आईएफएससी और एमआईसीआर छपा होने से इसकी इलेक्ट्रॉनिक क्लियरेंस में और तेजी आएगी। आरबीआई चाहता है कि आउट स्टेशन चेकों का भी स्पीडी क्लियरिंग हो। सबसे अहम बात , जब चेकों में वॉटर मार्क और बैंकों का लोगो नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में इमेज आधारित चेकों की जांच क्लियरिंग प्रोसेसिंस का हिस्सा बन जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम चेकों में छिपी हुई इमेज को पकड़ने में सक्षम होगा। जब नकली चेकों में छिपी इमेज नहीं होंगी तो नकली चेक आसानी से पकड़ में आएंगे।
हालांकि आरबीआई नए साल के पहले दिन से नए चेक की व्यवस्था लागू करना चाहता है, लेकिन बैंकों के बड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंकिंग शाखाओं में बेहद आधुनिक टेक्नॉलजी है, वहां नए चेक बुक जारी करने और उसे लागू करने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन जिन शाखाओं में ऐसा नहीं है, वहां पर इसे लागू करने में कुछ वक्त लग सकता है। इसके लिए आरबीआई ने उनको छूट दी है।
नए चेक में क्या है नया ?
नए चेक में अनिवार्य रूप से इंडियन फाइनैंशल सिस्टम कोड (आईएफएससी) और मैगनेटिक इंक कैरेक्टर (एमआईसीआर) छपा होगा। आईएफएससी दो कामों में बहुत जरूरी है। पहला, रीयल टाइम फंड सेटलमेंट और दूसरा, नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर। यह 11 नंबरों का होता है। पहले चार बैंक के कोड नंबर होते हैं, इसके बाद 0 होता है, जबकि बाद के 6 नबंर बैंक की शाखा के कोड नंबर होते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि यह चेक बैंक की किस शाखा ने जारी किया है। जहां तक एमआईसीआर की बात है तो यह मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर होते हैं, जिनके होने से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चेक पास कराने में बड़ी आसानी होती है।
- > सभी चेकों में वॉटर मार्क यानी बैंकों का चिह्न होगा। इस पर सीटीएस इंडिया लिखा होगा, जिसको हल्की रोशनी में देखा जा सकेगा।
- > बैंकों को चेक पर अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) इंक से अपना लोगो छापना होगा। इसे सिर्फ यूवी स्कैनर और लैंप से ही देखा जा सकेगा।
- > चेक का बैकग्राउंड क्लियर होगा और इस भाग पर किसी तरह की प्रिंटिग नहीं होगी। इससे चेक की क्वॉलिटी बेहतर होगी।
- > हर चेक के निचले हिस्से में सभी शाखाओं पर सममूल्य पर देय (Payable at par at all branches) लिखा होगा।
- > हर चेक पर हस्ताक्षर करने की जगह पर लिखा होगा कि कृपया इससे ऊपर हस्ताक्षर करें।
- > चेक पर किसी तरह की ओवर राइटिंग की इजाजत नहीं होगी। अगर बैंक चाहे तो तारीख बदलने की इजाजत दे सकता है। मगर नाम और दूसरे ब्यौरे में किसी तरह के करेक्शन की इजाजत नहीं होगी। ऐसा होने पर चेक स्वीकार नहीं किया जाएगा।
काम होगा तेज , फ्रॉड पर लगेगी लगाम
पूर्व वित्त सचिव एस . नारायण का कहना है कि आरबीआई काफी लंबे समय से चेक बुक के प्रारूप और स्वरूप में बदलाव की कोशिश कर रहा है। इसके पीछे दो मकसद हैं - चेकों के इलेक्ट्रॉनिक क्लियरेंस में तेजी लाना और नकली चेकों के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकना।
बैंकिंग सेक्टर के एक्सपर्ट के. के. मदान के अनुसार चेकों में वॉटर मार्क होने से इसकी फोटोकॉपी बनाना मुश्किल होगा। साथ ही आईएफएससी और एमआईसीआर छपा होने से इसकी इलेक्ट्रॉनिक क्लियरेंस में और तेजी आएगी। आरबीआई चाहता है कि आउट स्टेशन चेकों का भी स्पीडी क्लियरिंग हो। सबसे अहम बात , जब चेकों में वॉटर मार्क और बैंकों का लोगो नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में इमेज आधारित चेकों की जांच क्लियरिंग प्रोसेसिंस का हिस्सा बन जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम चेकों में छिपी हुई इमेज को पकड़ने में सक्षम होगा। जब नकली चेकों में छिपी इमेज नहीं होंगी तो नकली चेक आसानी से पकड़ में आएंगे।
अब क्या करें कस्टमर
जिनके पास पुराने चेक या चेक बुक हैं , वे बैंकों से नई चेकबुक ले लें। बैंक इसके लिए कोई फीस नहीं लेगें। बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि वे पहले से कस्टमर्स को इस बारे में सूचना दे रहे है। बैंकों की जिन शाखाओं में यह लागू होगा , उसमें 31 दिसंबर तक पुराने चेक स्वीकार किए जाएंगे। बाद में उनको क्लियर भी किया जाएगा। आप चेक बुक बैंक के काउंटर से ले सकते हैं या फिर फोन बैंकिंग , एटीएम या नेट बैंकिंग का यूज कर ऑर्डर कर सकते हैं।
एडवांस चेक का क्या करें
जिन्होंने बैंकों से लोन ले रखा है और उसके बदले में बैंकों ने एडवांस चेक ले रखे हैं , उनको घबराने की जरूरत नहीं है। बैंक खुद ही कस्टमर्स को फोन करके नए चेक देने की सूचनाएं देंगे। वैसे एडवांस चेकों के मामले में बैंकों के पास यह अधिकार रहेगा कि वे चाहे तो उससे काम चला सकते हैं।
कस्टमर्स को फायदा
- > चेकों की क्लियरेंस जल्दी होगी। मल्टी सिटी और सभी बैंकों की शाखाओं में सममूल्य (At Par) में उसके चेक को क्लियरेंस मिलेगी।
- > फंड ट्रांसफर करने में उसे किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। सिर्फ उसे चेक भरना होगा , क्योंकि चेक पर ही आईएफएससी और एमआईसीआर नंबर छपा होगा।
- > किसी भी शहर में , बैंक की किसी भी शाखा पर चेक जमा हो सकेंगे और उनकी क्लियरिंग हो सकेगी। जाहिर है, बैंकों के साथ आम लोगों का भी काम आसान हो जाएगा।
