बरसाती पानी ने बढ़ाई लोगों की परेशानियां
https://khabarrn1.blogspot.com/2015/07/rain-water-increased-difficulties-of-people.html
जयपुर। एक ओर जहां जयपुर शहर मेट्रो सिटी की ओर बढ़ रहा है, वहीं राजधानी के समीप सांगानेर में 40 फीसदी आबादी हिस्सा तीन दशक बाद भी सुविधाओं के लिए मौहताज है। सांगानेर में कई इलाकों की बस्तियों में कच्ची सड़क पर नालियों के अभाव में पानी की निकासी अवरूद्ध हो रही है, जिससे कई बस्तियों की सड़कों पर पानी भर जाने की वजह से वहां रहने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ा दी है।
यहां के अधिकांश इलाकों में सड़क, सीवरेज और नालियां नहीं होने से बरसात समय इन कॉलोनियों में नारकीय हाल है। लक्ष्मी विहार कॉलोनी, रामपुरा मार्ग पर सड़क मार्ग ही कई दिनों से पानी में डुबा है, जहां पर आवाजाही के लिए कोई रास्ता नहीं है। हालात यह है कि लोगों को सड़क पर भरे करीब एक-डेढ फीट गहरे गंदे पानी में पांव रखकर निकलना पड़ता है। यहां अभी तक पानी खींचने वाली मशीन लगाकर पानी भी बाहर नहीं निकाला गया है।
गौरतलब है कई वर्ष पहले प्रताप नगर में खुदाई करने के बाद बरसात से भरे पानी के गड्ढे से बने तालाब में डूबकर करीब तीन बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद बरसात से पहले मकानों और दूसरे कामों के लिए खोदे जाने वाले गड्ढे तथा खाली पड़े स्थानों पर पानी नहीं भरने के लिए कलक्टर की ओर से दिशा-निर्देश दिए गए थे मगर इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
आलम यह है कि रामपुरा मोड पर यहीं पास में एक निजी स्कुल के बच्चे रोज इस बरसाती पानी में डूबी कच्ची सड़क से होकर स्कूल जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। यहां पर लोग हादसों के साए में जीने को विवश है, लेकिन निगम प्रशासन की ओर से अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यहां के अधिकांश इलाकों में सड़क, सीवरेज और नालियां नहीं होने से बरसात समय इन कॉलोनियों में नारकीय हाल है। लक्ष्मी विहार कॉलोनी, रामपुरा मार्ग पर सड़क मार्ग ही कई दिनों से पानी में डुबा है, जहां पर आवाजाही के लिए कोई रास्ता नहीं है। हालात यह है कि लोगों को सड़क पर भरे करीब एक-डेढ फीट गहरे गंदे पानी में पांव रखकर निकलना पड़ता है। यहां अभी तक पानी खींचने वाली मशीन लगाकर पानी भी बाहर नहीं निकाला गया है।
गौरतलब है कई वर्ष पहले प्रताप नगर में खुदाई करने के बाद बरसात से भरे पानी के गड्ढे से बने तालाब में डूबकर करीब तीन बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद बरसात से पहले मकानों और दूसरे कामों के लिए खोदे जाने वाले गड्ढे तथा खाली पड़े स्थानों पर पानी नहीं भरने के लिए कलक्टर की ओर से दिशा-निर्देश दिए गए थे मगर इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
आलम यह है कि रामपुरा मोड पर यहीं पास में एक निजी स्कुल के बच्चे रोज इस बरसाती पानी में डूबी कच्ची सड़क से होकर स्कूल जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। यहां पर लोग हादसों के साए में जीने को विवश है, लेकिन निगम प्रशासन की ओर से अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
