सुब्रह्मण्यम स्वामी ने राष्ट्रगान में बदलाव के लिए लिखा पीएम मोदी को खत
https://khabarrn1.blogspot.com/2015/12/subramanian-swamy-writes-for-changes-in-national-anthom.html
नई दिल्ली। नेशनल हैराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कोर्ट में घसीटने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अब एक और हैरानी भरा काम करने के लिए कवायद की है। ख़बरों के अनुसार सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अब भारत के राष्ट्रगान में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है।
30 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए इस खत में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि, राष्ट्रगान 'जन गण मन...' को संविधान सभा में सदन का मत मानकर स्वीकार कर लिया गया था। उन्होंने लिखा है, '26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा के आखिरी दिन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बिना वोटिंग के ही 'जन गण मन...' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर लिया था। हालांकि, उन्होंने माना था कि भविष्य में संसद इसके शब्दों में बदलाव कर सकती है।'
स्वामी ने पीएम से अपील की है कि वह संसद में प्रस्ताव लाएं कि जन गण मन की धुन से छेड़छाड़ किए बगैर इसके शब्दों में बदलाव किया जाए। स्वामी ने सुझाव भी दिया है कि इसमें सुभाष चंद्र बोस द्वारा किए गए बदलाव को ही स्वीकार किया जा सकता है।
स्वामी ने लिखा है, 'नेताजी ने ज्यादातर शब्दों को जस का तस रखा था। सिर्फ ब्रिटिश राजा की तारीफ में गाए गए शब्दों को हटा दिया था। इसकी जगह उन्होंने देशभक्ति के संस्कृत शब्दों का इस्तेमाल किया था।'
स्वामी ने कहा है कि सुभाष चंद्र बोस के वर्जन में 95 फीसदी शब्द वैसे ही हैं, सिर्फ उन्होंने 5 फीसदी बदलाव किया था। उन्होंने मोदी से कहा है कि ऐसा करके सुभाष चंद्र बोस और देश के स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
30 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए इस खत को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर रि-ट्वीट किया है।
30 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए इस खत में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि, राष्ट्रगान 'जन गण मन...' को संविधान सभा में सदन का मत मानकर स्वीकार कर लिया गया था। उन्होंने लिखा है, '26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा के आखिरी दिन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बिना वोटिंग के ही 'जन गण मन...' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर लिया था। हालांकि, उन्होंने माना था कि भविष्य में संसद इसके शब्दों में बदलाव कर सकती है।'
Dr @Swamy39 writes to our honourable PM @narendramodi for a slight change in national anthem. @jagdishshetty pic.twitter.com/LUPPJdi7TC
— harsh yadav (@harshyadav0012) December 21, 2015
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने लिखा कि उस वक्त आम सहमति जरूरी थी क्योंकि कई सदस्यों का मत था कि इस पर बहस होनी चाहिए, क्योंकि इसे 1912 में हुए कांग्रेस अधिवेशन में ब्रिटिश राजा के स्वागत में गाया गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सदस्यों की भावना को समझते हुए यह काम भविष्य की संसद पर छोड़ दिया था। स्वामी ने पीएम से अपील की है कि वह संसद में प्रस्ताव लाएं कि जन गण मन की धुन से छेड़छाड़ किए बगैर इसके शब्दों में बदलाव किया जाए। स्वामी ने सुझाव भी दिया है कि इसमें सुभाष चंद्र बोस द्वारा किए गए बदलाव को ही स्वीकार किया जा सकता है।
स्वामी ने लिखा है, 'नेताजी ने ज्यादातर शब्दों को जस का तस रखा था। सिर्फ ब्रिटिश राजा की तारीफ में गाए गए शब्दों को हटा दिया था। इसकी जगह उन्होंने देशभक्ति के संस्कृत शब्दों का इस्तेमाल किया था।'
स्वामी ने कहा है कि सुभाष चंद्र बोस के वर्जन में 95 फीसदी शब्द वैसे ही हैं, सिर्फ उन्होंने 5 फीसदी बदलाव किया था। उन्होंने मोदी से कहा है कि ऐसा करके सुभाष चंद्र बोस और देश के स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
30 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए इस खत को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर रि-ट्वीट किया है।
