जानिए, आखिर क्या है नए लोकपाल विधेयक में ख़ास

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे के द्वारा लोकपाल बिल के लिए अनशन के बाद आखिरकार लोकपाल विधेयक...

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे के द्वारा लोकपाल बिल के लिए अनशन के बाद आखिरकार लोकपाल विधेयक पर संसद की दोनों सदनों ने अपनी मुहर लगा दी गई। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा और राष्ट्रपति के अनुमोदन मिलते ही ये विधेयक कानून की शक्ल ले लेगा। आखिर क्या है इस नए लोकपाल में और क्या यह लोकपाल बिल भ्रष्टाचार को रोकने में वाकई कारगर साबित होगा :-

लोकपाल बिल का ढांचा

> लोकपाल का एक अध्यक्ष होगा। लोकपाल का अध्यक्ष या तो भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है। लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होंगे। इसके अलावा कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए।

लोकपाल की चयन समिति

  • > प्रधानमंत्री : अध्यक्ष
  • > लोकसभा के अध्यक्ष : सदस्य
  • > लोकसभा में विपक्ष के नेता : सदस्य
  • > मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुशंसा पर नामित सुप्रीम कोर्ट के एक जज : सदस्य
  • > राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति : सदस्य

कौन नहीं हो सकता लोकपाल का सदस्य?

  • > संसद सदस्य या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा का सदस्य।
  • > ऐसा व्यक्ति जिसे किसी किस्म के नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया हो।
  • > ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र अध्यक्ष या सदस्य का पद ग्रहण करने तक 45 साल न हुई हो।
  • > किसी पंचायत या निगम का सदस्य।

पद छोड़ने के बाद

  • > लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति खत्म होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों पर कुछ काम करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है।
  • > इनकी अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती।
  • > इन्हें कोई कूटनीतिक ज़िम्मेदारी नहीं दी जा सकती और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं हो सकती। इसके अलावा ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी या नियुक्ति नहीं मिल सकती, जिसके लिए राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर से वॉरंट जारी करना पड़े।
  • > पद छोड़ने के पांच साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते।

लोकपाल के अधिकार


  • > कुछ मामलों में लोकपाल के पास दीवानी अदालत के अधिकार भी होंगे।
  • > क्लिक करें लोकपाल के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधिकारियों की सेवा का इस्तेमाल करने का अधिकार होगा।
  • > संपति को अस्थाई तौर पर नत्थी (अटैच) करने का अधिकार।
  • > नत्थी की गई संपति की पुष्टि का अधिकार।
  • > विशेष परिस्थितियों में भ्रष्ट तरीक़े से कमाई गई संपति, आय, प्राप्तियों या फ़ायदों को ज़ब्त करने का अधिकार।
  • > भ्रष्टाचार के आरोप वाले सरकारी कर्मचारी के स्थानांतरण या निलंबन की सिफ़ारिश करने का अधिकार।
  • > शुरुआती जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड को नष्ट होने से बचाने के लिए निर्देश देने का अधिकार।
  • > अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार।
  • > केंद्र सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई के लिए उतनी विशेष अदालतों का गठन करना होगा जितनी लोकपाल बताए।
  • विशेष अदालतों को मामला दायर होने के एक साल के अंदर उसकी सुनवाई पूरी करना सुनिश्चित करना होगा।
  • > अगर एक साल के समय में यह सुनवाई पूरी नहीं हो पाती तो विशेष अदालत इसके कारण दर्ज करेगी और सुनवाई तीन महीने में पूरी करनी होगी। यह अवधि तीन-तीन महीने के हिसाब से बढ़ाई जा सकती है।

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