मेघवाल की अगुवाई में बंधी विकास की उम्मीदें

पिछड़ेपन का दंश झेल रहे शाहपुरा को इस बार बड़ी अपेक्षा शाहपुरा। पिछले पांच साल तक प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने और क्षेत्र में कांग्र...

पिछड़ेपन का दंश झेल रहे शाहपुरा को इस बार बड़ी अपेक्षा

शाहपुरा। पिछले पांच साल तक प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने और क्षेत्र में कांग्रेस विधायक महावीर जीनगर के विधायक होने के बावजूद पिछड़ेपन का शिकार रहे शाहपुरा को इस बार प्रदेश की भाजपा सरकार और शाहपुरा के दूसरी बार विधायक बने कैलाश मेघवाल से खासी उम्मीदें हैं।

जीनगर के पांच साल तक संगठन से कन्नी काटने व पार्टी की गुटबाजी में रहने के कारण अन्य क्षेत्रों की तरह शाहपुरा को राज्य सरकार व केंद्र सरकार का कोई विशेष पैकेज नहीं मिल सका। डा. सीपी जोशी के भीलवाड़ा से सांसद बनने के बाद भी उन्होंने भी शाहपुरा को विकास से महरूम ही रखा। सांसद जोशी के स्वयं शाहपुरा की उपेक्षा करने से सांसद कोष से भी शाहपुरा में विकास कार्य नहीं हो सके। केंद्र सरकार की परियोजनाओं का लाभ भी क्षेत्र को नहीं मिल सका।

गत पांच सालों में शाहपुरा को विकास के नाम पर एक भी बेहतर सौगात नसीब नहीं हुई। हर बार शाहपुरा को अपने हक के लिए सडक़ पर आना पड़ा। पीने के पानी, चिकित्साल, कॉलेज के लिए तो कई बार आंदोलन हुए। जल आंदोलन में तो गिरफ्तारी तक होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी है। इसके बावजूद शाहपुरा को अपने हिस्से के विकास और हक से महरूम रहने जैसी नौबत का सामना करना पड़ा, लेकिन इस बार सशक्त बहुमत के साथ सरकार बना रही भाजपा की भावी सरकार और मजबूती के साथ अपना समर्थन देकर कैलाश मेघवाल को विधायक बनाकर विधानसभा में भेजने वाली जनता को अगले पांच सालों में शाहपुरा के माथे से पिछड़ेपन का दाग हटने के साथ विकास की पूरी उम्मीद जगी है।

नई सरकार से आशाएं

  • > शाहपुरा तहसील के तीनों बड़े बांधों की नहरों की मरम्मत कराना ताकि उसे जल का अपव्यय रोका जा सके तथा काश्तकारों को सिंचाई जल पूरी मात्रा में मिल सके। बांधों का जीर्णोद्वार हो जाए तो ग्रामीण क्षेत्र में जल परियोजनाओं का संचालन सुचारू किया जा सकता है।
  • > एक करोड़ रुपए की शहरी पेयजल योजना का काम पूरा होने के बाद भी शहर को 24 घंटे के बजाय 48 घंटे के अंतराल में पानी मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में कई गावों में आज भी पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। दोनों समस्याओं का निराकरण होने की उम्मीद।
  • > शाहपुरा में केसरीसिंह बारहठ राष्ट्रीय संग्राहलय, रामस्नेही संप्रदाय की अंर्तराष्ट्रीय पीठ, शक्तिपीठ धनोप व तीर्थ संगम धानेश्वर होने के बाद भी पर्यटन की दृष्टि से शाहपुरा में अब तक कुछ भी काम नहीं हुआ है, इस बार उम्मीद है कि पर्यटन विकास होगा।
  • > नगर पालिका की आर्थिक स्थिति तंगहाल होने व श्रेणी अनुसार क्रमोन्नयन न होने से राज्य सरकार की ओर से विकास के लिए अंशदान कम मिलता है अब उम्मीद है कि अंशदान बढ़ेगा, यहां दमकल गाडी की सुविधा मुहैया होगी तथा मास्टर प्लान के अनुरूप विकास के लिए पैकेज मिलेगा।
  • > बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कन्या महाविद्यालय तथा तकनीकी शिक्षा के लिए कॉलेज की मांग काफी समय से लंबित चली आ रही है। इसके अलावा क्षेत्र में ग्रामीण बच्चों को स्कूलों में शिक्षकों की कमी से बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही। इस बार गांवों के सभी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है। जरूरत के मुताबिक स्कूलों को क्रमोन्नत होना।
  • > राजकीय सेटेलाइट अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की सभी संभावनाएं मौजूद होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी से पूरा इलाज नहीं मिल रहा। डॉक्टरों के रिक्त पद भरना। फुलियाकलां में सीएचसी खोलना भी लंबित है।
  • > शाहपुरा बनेड़ा क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां सडक़ों का अभाव है। शहर की संपर्क व मुख्य सडक़ों से जोडऩे के लिए उन गांवों में सडक़ों का निर्माण होना।
  • > शहर की मुख्य सडक़ के डेवलपमेंट को लेकर मेगा हाइवे रोड प्रोजेक्ट के नाम पर सुनियोजित प्लानिंग नहीं होने से काम अधरझूल में अटका हुआ है। मेट्रो सिटी की तर्ज पर इस प्रोजेक्ट का पूरा होना।
  • > आजादी के बाद से अब तक रीको औद्योगिक क्षेत्र डेवलप नहीं हो पाया। रीको की घोषणा होने पर उद्योग के साथ क्षेत्रीय लोगों के लिए रोजगार बढऩा।
  • > क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्र से अध्ययन करने वाले स्टूडेंट के पलायन को रोकने व अवसर देने के लिए तकनीकी और लॉ कॉलेज खुलना।
  • > शाहपुरा में सडक़ डेवलपमेंट के साथ मजबूत ट्रैफिक सिस्टम डेवलप होना। ठेले व अस्थाई अतिक्रमण वालों को स्थान उपलब्ध करा कर बाजार को सुगम करना।
  • > नगर पालिका, अस्पताल, तहसील, पंचायत समिति सहित जरूरी सरकारी सेवाओं वाले विभागों में लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त सेवाएं उपलब्ध कराना।
  • > लंबे समय से चल रही पुरजोर कार्रवाई के बावजूद जिला नहीं बनने से शाहपुरा हताश है। नए जिलों के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट से मामला अटका रहा। अब जिला बनने की उम्मीद फिर से जगी है।

मंत्री बनने पर लाभ तो मिलेगा

शाहपुरा बनेड़ा क्षेत्र का हर वांशिदा इस उम्मीद में है कि कैलाश मेघवाल जैसे कद्दावर नेता के जीतने के बाद प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री बनना तय है। मंत्री वो शाहपुरा से 1993 में भी रह चुके है। अब फिर मंत्री बनते है तो निश्चित रूप से शाहपुरा का विकास होगा। मंत्री बनने से उनके विधानसभा क्षेत्र में निश्चित रूप से विकास होगा।
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