तेंदुलकर 74 रन पर आउट, भारत ने कसा मैच पर शिकंजा

मुम्बई। अपने करिअर का संभवत: आखिरी टेस्ट खेल रहे सचिन तेंदुलकर ने अपनी विदाई पारी में जादुई 74 रन बनाए, जिससे भारत ने दूसरे टेस्ट क्रिके...

मुम्बई। अपने करिअर का संभवत: आखिरी टेस्ट खेल रहे सचिन तेंदुलकर ने अपनी विदाई पारी में जादुई 74 रन बनाए, जिससे भारत ने दूसरे टेस्ट क्रिकेट मैच पर शुक्रवार को यहां शिकंजा कस दिया। भारत ने लंच तक तीन विकेट पर 282 रन बनाए हैं और उसकी बढ़त ठीक 100 रन की हो गई है। लंच के समय चेतेश्वर पुजारा 85 और विराट कोहली 36 रन पर खेल रहे थे।

तेंदुलकर और पुजारा ने तीसरे विकेट के लिए 144 रन की साझेदारी करके बड़े स्कोर की नींव रखी जिससे मैच के तीसरे दिन समाप्त होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सुबह का सत्र तेंदुलकर के नाम रहा जो अपना 200वां और आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे हैं। उन्होंने 38 रन से अपनी पारी आगे बढ़ायी और आज 68 मिनट तक क्रीज पर टिके रहे। उन्होंने कुल 118 गेंद का सामना किया तथा 12 दर्शनीय चौके लगाए।

वानखेड़े में पहुंचने वाले सभी दर्शकों को उम्मीद थी कि वह शतक लगाएंगे लेकिन जब वह 74 रन पर थे तब आफ स्पिनर नरसिंह देवनरिन की थोड़ा उछाल लेती गेंद को तेंदुलकर ने कट करने की कोशिश की लेकिन वह स्लिप में खड़े विरोधी टीम के कप्तान डेरेन सैमी के हाथों में चली गई। देवनारिन का नाम निश्चित तौर पर आने वाले वर्षों में इतिहास में दर्ज होगा क्योंकि लगता नहीं कि वेस्टइंडीज भारत को दूसरी बार बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित करने में सफल रहेगा। पिच अभी से टूट गई है और इसमें आगे बल्लेबाजी करना आसान नहीं होगा। हालांकि जब तक तेंदुलकर क्रीज पर हरे तब तक लोगों को पुराने तेंदुलकर की वास्तविक झलक देखने को मिली।

पुजारा जब स्ट्राइक रोटेट करने पर ध्यान दे रहे थे तब तेंदुलकर ने कुछ दर्शनीय स्ट्रोक लगाए। शेन शिलिंगफोर्ड पर उनका लेट कट, टिनो बेस्ट पर कवर पर लगाया गया बैकफुट पंच और ड्राइव दिलकश थे। उन्होंने बेस्ट पर ड्राइव लगाकर अपना अर्धशतक पूरा किया। यह तेंदुलकर का 68वां टेस्ट अर्धशतक था जो 91 गेंद में बना।

बेस्ट ने पहले बाउंसर से तेंदुलकर को परेशान करने की कोशिश की और बाद में छींटाकशी का सहारा लिया लेकिन ओवर के आखिर में उनके हाथ घुटने पर थे और लग रहा था कि मानो उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया हो। तेंदुलकर ने मित्रवत उनकी पीठ को थपथपाकर शायद याद दिलाया कि आज का बॉस कौन है। तेंदुलकर की पारी की विशेषता उनका शानदार फुटवर्क, ऑफ स्टंप से बाहर जाती फुललेंथ गेंदों को छोड़ना और गेंद की सही लाइन में आकर ड्राइव लगाना रहा। उन पर किसी तरह का दबाव नहीं दिख रहा था।

पुजारा को भी श्रेय जाता है जिन्होंने इस भावुक माहौल में खुद को शांतचित बनाए रखा। उन्हें जब भी ढीली गेंद मिली उन्होंने उसे करारा सबक सिखाने में देर नहीं की। कोहली ने अब तक एक घंटा क्रीज पर बिताया है और वह बड़ी पारी खेलने के मूड में दिख रहे हैं।

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