राजस्थान विश्वविद्यालय : कई विभाग ताले लगने की कगार पर

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में एक ओर नए विभाग खोलने और सीटें बढ़ाने की प्रतिवर्ष मांग चलती रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रवेश की शिथिलता, ...

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में एक ओर नए विभाग खोलने और सीटें बढ़ाने की प्रतिवर्ष मांग चलती रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रवेश की शिथिलता, प्रशासनिक लापरवही, अध्यापकों की कमी और प्रचार के अभाव में पुराने विभागों पर ताले लग रहे हैं, तो कहीं पर बंद करने की तैयारी चल रही है।

दरअसल इस सत्र में विवि में एक विभाग प्रवेश के अभाव में बंद हो चुका है, वहीं अगले सत्र से विवि के दो और विभागों के ताले लगने की कगार पर है। जल संसाधन एवं शोध केंद्र में इस बार प्रवेश नहीं होने के चलते लगभग बंद कर दिया गया है। विवि में स्थापना के समय से चालू यह विभाग इस सत्र से शायद हमेशा के लिए बदं कर दिया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक विवि की लापरवाही और समय पर बजट जारी कर छात्रों को सुविधाएं और रिसर्च के लिए संसाधन नहीं मिलने के कारण उदासीनता बढ़ती जा रही है। इस बार विभाग में प्रवेश का समय आया तो एक भी छात्र ने एडमिशन लेने में रुचि नहीं ली। विवि का यह विभाग हाल ही में एक राष्ट्रीय सेमिनार भी आयोजित करवा चुका है, मगर जिस तरह से विभाग में प्रवेश नहीं हो रहे उससे सेमिनार पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बंद का कारण प्रवेश नहीं होना : जानकारी में आया है कि वाटर रिसोर्स मेनेजमेंट डिपार्टमेंट प्रवेश नहीं होने के कारण बंद नहीं हो रहा, बल्कि विभाग की ओर से संसाधनों की कमी और कोर्स पूरा होने के बाद जॉब की संभावनाओं की कम संभावनाओं के चलते छात्रों ने यहां प्रवेश लेने में रुचि ही नहीं ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण है, जिसके चलते विभाग बंद होने जा रहा है। दरअसल विभाग में एक ही प्रोफेसर हैं, जो कि राजस्थान कॉलेज की प्रिंसिपल भी हैं। प्रिंसिपल कॉलेज में व्यस्त रहती है, ऐसे में आधे अधिक वक्त तो विभाग ही बंद रहता है।

दो अगले साल हो जाएंगे बंद : सूत्रों के मुताबिक अगर विवि में यही व्यवस्थाएं बनी रही, तो संभवत: अगले शैक्षणिक सत्र में दो और विभाग बंद हो जाएंगे। समाज शास्त्र विभाग में चल रहा एमएसडब्लू कोर्स, प्रवेश नहीं ले पाने के कारण संभवत: अगले सत्र में यह भी नहीं चल पाएगा। तीन सत्र में दो में बेहतर प्रवेश के बाद विवि के सबसे अधिक सफल विभागों में गिना जाने लगा था, मगर पिछले सत्र से विभाग की आपसी खींचतान के चलते चोथे सत्र में चाहने के बावजूद आधे भी छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाया।

इच्छुक विद्यार्थियों ने लगातार प्रवेश के लिए भरकस प्रयास किए, मगर हठधर्मिता के चलते करीब डेढ़ दर्जन छात्र ही प्रवेश ले पाएं। कुछ इसी तरह की दास्तान जन संचार विभाग की है, यहां पर बरसों से विभागाध्यक्ष के सहारे चल रहे कोर्स का भी भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।

जानकारी के मुताबिक 2014 में विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव भानावत के सेवानिवृत होने के बाद इइस विभाग का कोई धणी-धोरी नहीं बचेगा। बरसों से प्रो. भानावत ही यहां के सब-कुछ हैं। वे ही कक्षाएं लेते हैं, और वे ही विभाग को देखते हैं। अगले साल उनके रिटायर होना है, मगर अब तक किसी की न तो किसी प्रोफेसर को लगाया गया है, और न ही नई शिक्षक भर्ती में इस विभाग के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है।


दोनों कोर्स एसएफएस हैं : एमजेएमसी कोर्स जहां काफी सालों से विवि में चल रहा है, वहीं इसमें छात्रों की संख्या भी पूरी रहती है। यहां से पास हुए छात्र आज अच्छी जगह उच्च स्तर की पत्रकारिता कर रहे हैं। मगर इसके बावजूद अब तक भी यह विभाग एसएफएस ही चल रहा है। वार्षिक फीस के पेटे करीब 12 हजार रुपए लिए जाते हैं।

जानकारी में आया है कि इसका नियमों के तहत 40 फीसदी हिस्सा विवि के पास चला जाता है, बाकि यहां आने वाली गेस्ट फेकल्टी और अन्य खर्चों पर व्यय किया जाता है। वहीं दूसरी ओर एमएसडब्लू का भी यही हाल है। करीब 22 हजार रुपए सालाना फीस के बाद भी छात्रों को न तो इंटनशिप के लिए कहीं फील्ड वर्क करवाया जाता है, और न ही अलग से विभाग बनाकर कोर्स को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार एमएसडब्लू को विभागाध्यक्ष भी चलाने के मूढ़ में नहीं हैं। पिछले दिनों इसी खींचतान के चलते कोर्स की कंविनर डॉ. रश्मि जैन इस्तीफा दे दिया था।

दूसरे विवि को होगा लाभ : सूत्रों के मुताबिक जहां एमएसडब्लू को बंद करने से एक अन्य विवि को फायदा पहुंचाने की बात सामने आ रही है, वहीं एमजेएमसी कोर्स के बंद होने से जयपुर में हाल ही में खुले पत्रकारिता विवि को लाभ मिलेगा। दरअसल रसूख और राजस्थान विवि के खास प्रोफेसर्स के रिस्तेदार के एक विवि को एमएसडब्लू में छात्र नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में राजस्थान यूनिवर्सिटी में कोर्स के बंद होने पर उसी विवि में प्रवेश बढेंगे। इधर प्रदेश के पहले पत्रकारिता एवं जन संचार विवि को राजस्थान विवि में जन संचार केंद्र बंद होने पर सीधा लाभ मिलेगा।

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