मंदिर में मातम, मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 111

भोपाल। " मंदिर में मातम ", हालात को देखते हुए ये कहना शायद गलत नहीं होगा। क्योंकि रविवार को मध्यप्रदेश के दतिया से करीब 60 कि...


भोपाल। "मंदिर में मातम", हालात को देखते हुए ये कहना शायद गलत नहीं होगा। क्योंकि रविवार को मध्यप्रदेश के दतिया से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रतनगढ़ माता मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे से मरने वालों की संख्या बढ़कर 111 हो गई है। जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए है।

रतनगढ़ मंदिर में आस्था की नवमी काल की नवमी में बदल गई। नवरात्रा का आखिरी दिन और रविवार की छुट्टी होने की वजह से मंदिर में लाखों की तादाद में श्रृद्धालु मत के दर्शन करने के लिए जुटे थे। यूँ तो पूरे नवरात्र के दौरान यहां हर साल की श्रद्धालु जुटते हैं, लेकिन रविवार का दिन होने की वजह से मत के दर्शन करने आए श्रृद्धालुओं की तादाद बहुत बड़ी थी।

यह मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर है और उसका रास्ता सिंध नदी पर बने एक संकरे पुल से होकर गुजरता है। लाखों लोगों का रेला इस पुल से गुजर रहा था, उसी बीच किसी ने अफवाह उड़ाई कि पुल टूट रहा है। बस, इसके बाद तो यहां लगाए जा रहे माता के जयकारे देखते ही देखते चीख-पुकार और मातम में बदल गए। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भागना शुरू कर दिया।

भगदड़ की वजह से कई लोग निढाल होकर गिर पड़े और अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे लोगों ने नीचे गिरे पड़े लोगों पर पांव रखकर लोग भाग-दौड़ शुरू कर दी। कुछ ने तो पुल से गिरकर मरने के दर से जान बचाने के लिए पुल के नीचे बह रही नदी में कूदकर जान बचने की कौशिश की, जिसमे भी काफी लोगों की मौत हो गई और बहुत से घायल हो गए।

चश्मदीदों के मुताबिक जिस बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ यहां जुटती है उसे नियंत्रित करने के इंतजाम नहीं किए गए थे। मंदिर जाने वाले और दर्शन के बाद मंदिर से लौटने वाले लोगों को अलग-अलग गुजारने के कोई इंतजाम नहीं थे। आने और जाने वाले लोगों को अलग करने के लिए बांस की बल्लियों की कतारें नहीं बनाई गई थीं। लोगों की भारी भीड़ संभालने के लिए पुलिस वाले भी कम थे। आरोप है कि जब सिंध नदी पर बने पुल पर भीड़ रेंगने लगी तो पुलिस वालों ने लोगों को आगे बढ़ाने के लिए हल्का लाठीचार्ज कर दिया। आरोप है कि पुलिस की लाठी से बचने के लिए लोग भागे और भगदड़ मच गई।

भगदड़ में जख्मी होने वालों को ग्वालियर और दतिया के अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। सैकड़ों की तादाद में घायल हुए लोगों के परिजन अस्पताल के बहार रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं। पुल के ऊपर और जहां-तहां गिरी पड़ी लाशों के ढ़ेर में लोग अपने परिजनों को तलाशते नजर आ रहे हैं। रोते-बिलखते हुए अपने परिजनों को ढूंढ रहे लोगों की दशा देख लग रहा था, जैसे ये मन ही मन कह रहे हो की माता ने उन्हें आखिर किस गुनाह की सजा दी है।

गौरतलब है कि 2006 की नवरात्र में भी यहां ऐसा ही वीभत्स हादसा हुआ था। नदी पार करके दर्शन के लिए जा रहे 50 तीर्थयात्री शिवपुरी के मनिखेड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के कारण सिंध नदी में बह गये थे। तब आरोप लगे थे कि बांध से पानी छोड़ने की सूचना न होने के कारण हादसा हुआ था।

इसके अलावा इस हादसे ने चामुंडा माता मंदिर में हुए हादसे के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। राजस्थान में जोधपुर के मेहरानगढ़ में स्थित चामुंडा माता के मंदिर में भी नवरात्र के पहले ही दिन लाखों की तादाद में लोग माता के दर्शन के लिए उमड़े थे। माता के दर्शन कर नवरात्र की शुरुआत करने की चाह से आए लाखों की तादाद में जमा श्रृद्धालुओं में अचानक से मंदिर के पास की एक दीवार टूटने की अफवाह फैली और भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में भी सैंकड़ों श्रृद्धालु मौत की भेंट चढ़ गए थे।


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