मौत के साये में हो रहा खनन , हाईटेंशन लाइनों के नीचे चल रही खदाने
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भीलवाड़ा। सरकारी कारिंदों की आंखों पर जब लोभ की पट्टी बंध जाए तो उन्हें आमजन को होने वाले जान-माल का बड़ा नुकसान भी दिखाई देना बंद हो जाता है। खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारियों के कुछ ऐसे ही कारनामों की झलक बिजौलिया खनन क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर हाईटेंशन लाइनों के नीचे किए गए खदान एग्रीमेंटों में दीवार पर लिखी इबारत की तरह साफ दिखाई देती है।
बिजौलिया खनिज, राजस्व व विद्युत विभाग की मिलीभगत से नियमों को धत्ता बताते हुए आधा दर्जन खदानें हाईटेंशन लाइनों के नीचे एग्रीमेण्ट कर दी गई एवं लम्बे अर्से से खनन को अंजाम देकर करोड़ों का पत्थर भी निकाला जा चुका है और वह आज भी खनन बदस्तूर जारी है।
क्षेत्र के आरोली, नयानगर व उदपुरिया में हाई टेंशन लाइनों के नीचे किए जा रहे खनन कार्य के दौरान होने वाले ब्लास्टिंग से कभी भी हाई टेंशन लाइन के तार टूट कर किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते है। खदानों में काम करने वाले कारीगर-मजदूरों के साथ ही आसपास के ग्रामीणों को जानमाल का भारी नुकसान होने का अंदेशा है। इसके बावजूद भी विभाग के आला अधिकारी व प्रशासन आंखे मूंदे बैठे हैं।
बिजौलिया खनिज, राजस्व व विद्युत विभाग की मिलीभगत से नियमों को धत्ता बताते हुए आधा दर्जन खदानें हाईटेंशन लाइनों के नीचे एग्रीमेण्ट कर दी गई एवं लम्बे अर्से से खनन को अंजाम देकर करोड़ों का पत्थर भी निकाला जा चुका है और वह आज भी खनन बदस्तूर जारी है।
क्षेत्र के आरोली, नयानगर व उदपुरिया में हाई टेंशन लाइनों के नीचे किए जा रहे खनन कार्य के दौरान होने वाले ब्लास्टिंग से कभी भी हाई टेंशन लाइन के तार टूट कर किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते है। खदानों में काम करने वाले कारीगर-मजदूरों के साथ ही आसपास के ग्रामीणों को जानमाल का भारी नुकसान होने का अंदेशा है। इसके बावजूद भी विभाग के आला अधिकारी व प्रशासन आंखे मूंदे बैठे हैं।