'नकद रहित अर्थव्यवस्था के लिए एटीम बंद करें सरकार'
https://khabarrn1.blogspot.com/2015/09/govt-should-close-to-atms-soon-for-cashless-economy.html
नई दिल्ली। व्यापारियों के शीर्ष संगठन कंफेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज केंद्र सरकार से कहा है कि यदि देश में नकदरहित अर्थव्यवस्था को बनाने के प्रति गंभीरता है तो सरकार को सभी बैंकों को एटीएम मशीन बंद करने की सलाह देनी चाहिए, लेकिन यह कदम कई चरणों में पूरा किया जाना चाहिए।
एटीएम बंद करने से पहले सरकार को पहले चरण में एटीएम मशीन की संख्या को काम करना चाहिए और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ज्यादा से ज्यादा कार्ड मशीन लगाने को प्रोत्साहन देना चाहिए। वर्तमान में देशभर में केवल 12 लाख कार्ड मशीन का ही इस्तेमाल होता है।
एटीएम मशीन से नकद राशि का प्रचलन बढ़ता है, इसलिए यह सरकार के नकद रहित अर्थव्यवस्था के निर्माण के उद्देश्यों के विपरीत है। देश में कार्ड के कुल इस्तेमाल का 95% एटीएम से नकद निकलने में लगता है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की देश में कार्ड से भुगतान करने को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकों द्वारा डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर लिए जाने वाले शुल्क को सरकार द्वारा समाप्त किया जाना चाहिए। वर्तमान में बैंक क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर लगभग 2% एवं डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर 1% शुल्क लेते हैं, जो हतोत्साहित करता है।
बैंकों द्वारा कार्ड मशीन को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर देने के लिए जो मासिक शुल्क लिया जाता है। सरकार को उसमें भी रियायत देनी चाहिए। कार्ड मशीन का मासिक शुल्क लगभग 1,000 रुपये बैंकों द्वारा लिया जाता है। वहीँ कार्ड मशीन खरीदने की कीमत लगभग 6,000 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये होती है।
कैट ने सुझाव दिया है कि कार्ड मशीन की कीमत काम करने के लिए सरकार कार्ड मशीन के आयात पर लगने वाली ड्यूटी को ख़त्म करें। वहीँ दूसरी ओर मेक इन इंडिया योजना के अंतर्गत कार्ड मशीन के निर्माण को देश में ही सुलभ कराने पर भी कदम उठाये जाने चाहिए।
कैट ने यह भी कहा कि व्यावसायिक लेन-देन को कार्ड द्वारा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार करों में रियायतें दे। वहीँ दूसरी ओर आम लोगों द्वारा कार्ड इस्तेमाल किये जाने पर भी करों अथवा अन्य सरकारी भुगतान में रियायतें देनी चाहिये।
एटीएम बंद करने से पहले सरकार को पहले चरण में एटीएम मशीन की संख्या को काम करना चाहिए और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ज्यादा से ज्यादा कार्ड मशीन लगाने को प्रोत्साहन देना चाहिए। वर्तमान में देशभर में केवल 12 लाख कार्ड मशीन का ही इस्तेमाल होता है।
एटीएम मशीन से नकद राशि का प्रचलन बढ़ता है, इसलिए यह सरकार के नकद रहित अर्थव्यवस्था के निर्माण के उद्देश्यों के विपरीत है। देश में कार्ड के कुल इस्तेमाल का 95% एटीएम से नकद निकलने में लगता है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की देश में कार्ड से भुगतान करने को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकों द्वारा डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर लिए जाने वाले शुल्क को सरकार द्वारा समाप्त किया जाना चाहिए। वर्तमान में बैंक क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर लगभग 2% एवं डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर 1% शुल्क लेते हैं, जो हतोत्साहित करता है।
बैंकों द्वारा कार्ड मशीन को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर देने के लिए जो मासिक शुल्क लिया जाता है। सरकार को उसमें भी रियायत देनी चाहिए। कार्ड मशीन का मासिक शुल्क लगभग 1,000 रुपये बैंकों द्वारा लिया जाता है। वहीँ कार्ड मशीन खरीदने की कीमत लगभग 6,000 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये होती है।
कैट ने सुझाव दिया है कि कार्ड मशीन की कीमत काम करने के लिए सरकार कार्ड मशीन के आयात पर लगने वाली ड्यूटी को ख़त्म करें। वहीँ दूसरी ओर मेक इन इंडिया योजना के अंतर्गत कार्ड मशीन के निर्माण को देश में ही सुलभ कराने पर भी कदम उठाये जाने चाहिए।
कैट ने यह भी कहा कि व्यावसायिक लेन-देन को कार्ड द्वारा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार करों में रियायतें दे। वहीँ दूसरी ओर आम लोगों द्वारा कार्ड इस्तेमाल किये जाने पर भी करों अथवा अन्य सरकारी भुगतान में रियायतें देनी चाहिये।
