सबके साथ से ही सबका विकास संभव : वसुंधरा राजे

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कोटा। कोटा के महाराव उम्मेदसिंह स्टेडियम में राज्य स्तरीय स्वाधीनता दिवस समारोह में झंडारोहण के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेशवासियों के नाम अपने सम्बोधन में प्रदेश को विकास की नई बुलन्दियों तक ले जाने के सरकार के प्रयासों में भागीदार बनने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बूंद-बूंद से सागर भरता है, प्रदेश के लिए आपका छोटा सा प्रयास प्रगति की राह में एक बड़ा कदम साबित होगा। जब तक सबका साथ नहीं होगा तब तक सबका विकास भी नहीं होगा।

उन्होंने स्वाधीनता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर भव्य संयुक्त परेड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय सेवाएं प्रदान करने वाली प्रतिभाओं को पदक एवं योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रदेश ऋग्वेद के चरैवेति-चरैवेति मंत्र को आत्मसात करते हुए निरन्तर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जिस आशा और विश्वास के साथ जनता ने प्रदेश का भविष्य सौंपा है। राजधर्म को सर्वोपरि मानते हुए हम आपके विश्वास पर खरा उतरेंगे। प्रत्येक व्यक्ति अपनी पूरी ऊर्जा के साथ विकास में भागीदार बनेगा तभी सही मायने में राजस्थान का पुनर्निर्माण होगा।

राजे ने कहा कि हमारी सरकार पंडित दीनदयाल के आदर्शों पर चलने वाली सरकार है। उन्होंने हमें अन्त्योदय के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया, जिसके माध्यम से हमें गरीबों की सेवा करने की प्रेरणा मिली। हमारा लक्ष्य विकास की रोशनी उस व्यक्ति के घर तक भी पहुंचाना है, जो कतार में सबसे पीछे खड़ा है।


राजे ने कहा कि इस पवित्र मौके पर कहा कि, "मैं हाड़ौती की वीर भूमि को वन्दन करती हूँ, जहाँ का रोम-रोम शौर्य और बलिदान की कहानियां बयां कर रहा है। उन्होंने हाड़ी रानी की कुर्बानी की गाथा को याद करते हुए कहा कि हाड़ौती उस हाड़ी रानी की जन्मस्थली है, जिसने पति को रणभूमि में भेजने के लिए हंसते-हंसते अपना सिर काटकर अर्पित कर दिया था। उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र के जन-जन की आस्था के केन्द्र एवं पर्यटन स्थलों का भी जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हमने आजादी के लिए मिलकर संघर्ष किया था, उसी प्रकार भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और साम्प्रदायिकता के खिलाफ सबको मिलकर संघर्ष करना होगा। एक-दूसरे के साथ प्रेम और भाईचारे की डोर में बंधकर आगे बढऩा होगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि विरासत में मिले आर्थिक संकट से राजस्थान को अगर उबारना है तो धरना, प्रदर्शन और आंदोलन की राजनीति से ऊपर उठकर हमें सामूहिक संकल्प, सामूहिक प्रयास और सामूहिक शक्ति के साथ इस कल्पना को साकार करना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार इस पावन उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपका नेतृत्व कर सकती है, योजनाएं बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है, विकास का रोडमैप बना सकती है, किंतु अकेले इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती। इसके लिए जनता की भी भागीदारी और प्रयास जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय एक-दूसरे पर उंगली उठाने का नहीं है। यह वक्त है एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढऩे का।


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