मृतक काश्तकार की पुत्री को मिला न्याय
उपखण्ड अधिकारी जगदीश नारायण बैरवा के अनुसार ग्राम पंचायत खवास में खातेदार श्रीलाल की मृत्यु 25 वर्ष पूर्व हो गई थी, लेकिन विरासत के नामान्तरकरण के समय मृतक के तीन पुत्र भंवरलाल, सत्यनारायण, रामनारायण एवं विधवा पत्नी रामप्यारी का नाम ही खातेदारी में दर्ज किया गया एवं पुत्री विमलादेवी का नाम दर्ज नही हो सका था।
बैरवा के अनुसार विमलादेवी ने अपने हक को प्राप्त करने के लिए उपखण्ड न्यायालय केकड़ी में वाद दायर किया हुआ था, जिसके आधार पर आज ग्राम पंचायत खवास में आयोजित राजस्व लोक अदालत शिविर में प्रतिवादी भाईयों को समझाईश के द्वारा बताया गया कि पुत्रा व पुत्री में कोई भेद नही होता है, विमला देवी को उसका अधिकार मिलना चाहिए, जिस पर विमला देवी के तीनों भाईयों ने आपसी मनमुटाव को भुलाकर पिता की संपत्ति में बहन को हक देने की रजामंदी दे दी। इस प्रकार 25 वर्षों बाद भाई-बहन एकजुट हो गये और विमलादेवी को पिता की भूमि में खातेदारी का हक भी मिल गया।