आज भी 2008 में जी रहा राजस्थान का एक अनोखा जिला!

बाड़मेर (RN1 संवाददाता)। प्रदेश में नई सरकार की कार्यशैली को लेकर एक ओर जहां ये लगता है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल वाले 5 साल में प्रदेश...

बाड़मेर (RN1 संवाददाता)। प्रदेश में नई सरकार की कार्यशैली को लेकर एक ओर जहां ये लगता है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल वाले 5 साल में प्रदेश में कई बदलाव होंगे और विकास के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती इलाके बाड़मेर में इन उम्मीदों के विपरीत कार्य होता नजर आ हो रहा है।

यहां जिम्मेदार लोगों के पास सरकारी वेबसाइट का डाटा अपडेट करने तक का समय नहीं हैं, जिससे वेबसाइट को देखकर ऐसा प्रतीत होता कि जैसे यहां सन 2008 के बाद कुछ भी बदलाव नहीं हुआ। 21वीं सदी में जहां दुनिया पल-पल में अपडेट हो रही है, वहीं बाड़मेर जिला कलेक्टर के बगल में बैठे जिले की वेबसाईट को अपडेट करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी दुनियादारी से कोई सरोकार नही रखते।

प्रदेश की मुखिया वसुंधरा राजे सरकारी योजनाओं और अपने निर्णयों से प्रतिदिन सोशल नेटवर्किंग साईट्स के जरिये आमजन को बाखबर कर रही हैं लेकिन बाड़मेर जिले की सरकारी वेबसाइट तो 2007-08 के बाद अपडेट करने की किसी के पास फुर्सत नही हैं। यह अलग बात हैं कि वे वेबसाईट में एक कोने में जरूर चार-पांच दिन में अपडेट की तारीख चैंज कर देते हैं लेकिन अंदर का डाटा 2007-08 का ही लेकर बैठे हैं।

अपडेट करने के बजाय कर दी सूची ही गायब

मानसून आने में अब कुछ ही समय शेष बचा है, लेकिन जिला प्रशासन की वेबसाईट पर आपदा प्रबंधन से जुड़ी ना तो किसी प्रकार की कोई जानकारी उपलब्ध है और ना ही डिजास्टर मैनेजमैंट से जुड़े अधिकारियों के सम्पर्क सूत्र। कुछ समय पूर्व तक  यहां 2009 तक के अफसरों के नाम व सम्पर्क सूत्र दिये हुए थे। इस संबध में अखबारों में समाचार प्रकाशित होने के बाद विभाग ने इसे अपडेट करने की बजाय यहां मौजूद 58 पृष्ठीय सम्पर्क सूची को ही वेबसाईट से गायब कर दिया।अब इस लिंक पर क्लिक करने पर यहां एक सूची खुलती है। इसमें तीन नाम नजर आते हैं, जिनमें कैयर्न इंडिया, राज वेस्ट पावर और गिराल लिग्नाइट पावर लिमिटेड का डिजास्टर/इमरजेंसी मैनेजमेंट प्लान डाला हुआ है।

यूं जाएं वेबसाईट पर

जिले की बेबसाईट (बाड़मेर डॉट एनआईसी डॉट इन) पर जाने के बाद 'डिपार्टमेंट स्टेटिक्स' वाले लिंक पर क्लिक करने पर जिले के सभी प्रमुख विभाग प्रदशित होते हैं, जिन पर सीधा क्लिक करने पर उनका कोई लिंक वहां खुलता ही नहीं हैं। स्क्राल डाउन करने पर तमाम विभागों के नीचे की ओर ऊपर दिये गये सभी विभागों के बारें में आवश्यक जानकारी व आंकड़े दिये गये हैं, जिसको देखकर आमजन जिले की स्थिति तथा प्रत्येक विभाग से जुडी जानकारी व विकास योजनाओं के साथ जिले के जनप्रतिनिधियों, पशुपालन व अन्य विकास योजनाओं में किस मद से कितना पैसा खर्च किया गया है तथा विभिन्न क्षेत्रों में जिले का प्रदर्शन कैसा रहा है, यह जान सकता हैं।  लेकिन यहा दुविधा यह है कि इन तमाम आंकाड़ों में 2003-2008 तक के ही आंकड़े दिए गए हैं, जिनसे प्रतीत होता है कि शायद 2008 के बाद यहां कुछ हुआ ही नहीं है। अब ऐसे में अगर कोई व्यक्ति जिले के संबंध में कोई जानकारी पाने के लिए जिले की सरकारी वेबसाईट पर विजिट करके देखे तो उसे यहां सिर्फ पुराने आंकड़े ही नजर आएंगे।

लॉस्ट अपडेट 3 जून 2014

जिले की इस सरकारी वेबसाइट पर विजिट करने वालो कोई व्यक्ति जब यहां से कोई जानकारी जुटाए बिना लौटता है तो ऐसे में सवाल यह उठता हैं कि क्या बाड़मेर जिले में वर्ष 2007-08 के बाद ना तो किसी तरह का कोई बदलाव हुआ और ना ही कोई विकास कार्य करवाया गया? जिले में पशुओं के आंकड़ो में फैरबदल नहीं हुआ यही नहीं जिले के हर विभाग से जुड़ी जानकारियां 2007-08 की ही है। चाहे वह पुलिस विभाग हो या जिला परिषद, पशुपालन, समाज कल्याण या बाल विकास विभाग।

मजेदार बात तो यह है कि जिले का जानकारी प्रदान करने वाली यह वेबसाइट एक ओर जहां 2008 के बाद का कोई भी आंकड़ा नहीं रखती है वहीं दूसरी ओर वेबसाइट के होमपेज पर इसकी लास्ट अपडेट वाली दिनांक 3 जून 2014 प्रदर्शित हो रही है, जिसके अनुसार यह वेबसाइट आखिरी बार 3 जून 2014 को अपडेट की गई है।


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