सी ग्रेड फिल्म नहीं है 'मिस लवली' : आशिम
मुंबई। फिल्म निर्देशक असीम आहलुवालिया की विदेशों में खूब सराही गई फिल्म 'मिस लवली' अब भारत में भी रिलीज होने वाली है। इस फिल्म क...
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मुंबई। फिल्म निर्देशक असीम आहलुवालिया की विदेशों में खूब सराही गई फिल्म 'मिस लवली' अब भारत में भी रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने 'ए' सर्टिफिकेट दिया है। असीम ने बताया कि भारत में रिलीज करने की इजाजत देने से पहले सेंसर बोर्ड ने फिल्म से 157 सीन हटवा दिए।
फिल्म निर्देशक आशिम अहलूवालिया ने जोर देकर कहा है कि उनकी फिल्म मिस लवली सी-ग्रेड फिल्म नहीं है जिसे सेंसर बोर्ड ने ए-सर्टिफिकेट दिया है। उन्होंने बताया कि फिल्म दो भाइयों विक्की और सोनू दुग्गल की कहानी है, जिसका किरदार अनिल जॉर्ज और नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया है। दोनों 1980 के मध्य दशक में अवैध सेक्स हॉरर फिल्म बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसमें दुग्गल भाइयों और अभिनेत्री पिंकी के संघर्ष को दिखाया गया है। पिंकी का किरदार पूर्व मिस इंडिया प्रतिभागी निहारिका सिंह ने निभाया है।
आशिम कहते हैं कि मुझे इस फिल्म को और अधिक कट के बिना पास कराने में एक वर्ष के करीब समय लग गया। हमने कई समीक्षा बैठकें की। इसकी शुरुआत 157 कट के साथ हुई। मैंने कहा कि हम यह फिल्म नहीं दिखा सकते। यह तो फिल्म की हत्या करने जैसा है। मैंने फिर तर्क दिया, तब अभद्र भाषा समस्या थी। इसलिए प्रत्येक समीक्षा बैठक के साथ कट की संख्या कम होती गई। अंतत: हम तीन-चार प्रमुख कटों पर सहमत हुए।
फिल्म निर्देशक आशिम अहलूवालिया ने जोर देकर कहा है कि उनकी फिल्म मिस लवली सी-ग्रेड फिल्म नहीं है जिसे सेंसर बोर्ड ने ए-सर्टिफिकेट दिया है। उन्होंने बताया कि फिल्म दो भाइयों विक्की और सोनू दुग्गल की कहानी है, जिसका किरदार अनिल जॉर्ज और नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया है। दोनों 1980 के मध्य दशक में अवैध सेक्स हॉरर फिल्म बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसमें दुग्गल भाइयों और अभिनेत्री पिंकी के संघर्ष को दिखाया गया है। पिंकी का किरदार पूर्व मिस इंडिया प्रतिभागी निहारिका सिंह ने निभाया है।
आशिम कहते हैं कि मुझे इस फिल्म को और अधिक कट के बिना पास कराने में एक वर्ष के करीब समय लग गया। हमने कई समीक्षा बैठकें की। इसकी शुरुआत 157 कट के साथ हुई। मैंने कहा कि हम यह फिल्म नहीं दिखा सकते। यह तो फिल्म की हत्या करने जैसा है। मैंने फिर तर्क दिया, तब अभद्र भाषा समस्या थी। इसलिए प्रत्येक समीक्षा बैठक के साथ कट की संख्या कम होती गई। अंतत: हम तीन-चार प्रमुख कटों पर सहमत हुए।
