5वीं और 8वीं में बोर्ड परीक्षा पर राज्य सरकार करेगी फैसला : प्रकाश जावड़ेकर

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जयपुर। केंद्रीय  मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राजस्थान में मनरेगा के तहत विद्यालय खेल मैदान निर्माण के हुए कार्यों को अभूतूर्व बताते हुए कहा कि राजस्थान की तर्ज पर देशभर में इस योजना को लागू किया जाएगा। उन्होंने राजस्थान को अच्छी शिक्षा का केन्द्र बनने के लिए बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों की यह मांग रही है कि शैक्षिक गुणवत्ता के लिए  5 वीं और 8 वीं की परीक्षा प्रारंभ की जाए। इसलिए हमने यह निर्णय लिया है कि अगले संसद सत्र में 5वीं और 8वीं की परीक्षा प्रारंभ करने का अधिकार राज्यों को देने के लिए कार्यवाही की जाएगी।

‘लर्निंग आउटकम’ से शिक्षा में गुणवत्ता वृद्धि के होंगे प्रयास
जावड़ेकर आज यहां खासाकोठी में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्यों को साथ लेकर चलने की नीति पर कार्य हर रही है। उद्देश्य यही है कि देशभर में अच्छी शिक्षा का प्रसार हो।  उन्होंने कहा कि देशभर में प्राथमिक शिकस्त के अंतर्गत ‘लर्निंग आउटकम’ के प्रावधानों को नियमों में रखकर बच्चों को लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे यह पता चल सकेगा कि पहली कक्षा, दूसरी कक्षा और तीसरी कक्षा आदि के बाद विद्यार्थियों को क्या-क्या अपेक्षित पढ़ाई करवाई जानी जरूरी है। उन्होंने कहा केन्द्र सरकार का यह लक्ष्य है कि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि हो।

राजस्थान में 15 लाख की नामांकन वृद्धि, रिक्तियां 10 प्रतिशत रहना महत्वपूर्ण
बैठक में राजस्थान में पंचायत स्तर पर उत्कृष्ट, आदर्ष विद्यालयों की स्थापना, राजकीय विद्यालयों में 15 लाख विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि, शिक्षकों की बड़ी संख्या में पदोन्नति और पारदर्शिता से पदस्थापन, अपनी बेटी योजना और छात्राओं को प्रोत्साहन दिए जाने के हुए कार्यों, शिक्षक प्रशिक्षण के अपनाए गए तरीकों और शिक्षकों की रिक्तियां मात्र 10 प्रतिशत ही रहने के लिए उठाए गए कदमों की विषेष रूप से सराहना की तथा कहा कि शिक्षा क्षेत्र के यह ऐसे कदम हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों को भी अपनाना चाहिए।

शैक्षिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता : देवनानी
शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में शैक्षिक उन्नयन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली कक्षा में प्रवेष की आयु 6 से घटाकर 5 वर्ष करने का निर्णय जहां किया गया है, वहीं शिक्षक-अभिभावक बैठकों को प्रारंभ कर शैक्षिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया है।

देवनानी ने कहा कि राज्य में 13 हजार 500 विद्यालयों में संस्कृत के पद सृजित किए गए हैं। भामाशाहों के सहयोग से राज्य के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी  विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार अपनाते हुए पाठ्यक्रमों में गुणात्मक परिवर्तन के लिए भी प्रयास किए गए हैं।

इससे पहले शिक्षा विभाग के शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने राजस्थान में विभिन्न स्तरों पर क्रियान्वित शिक्षा योजनाओं और उनसे शैक्षिक गुणवत्ता के लिए किए गए प्रयासों और आए परिणामों पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री अपनी बेटी योजना के तहत छात्राओं को लाभान्वित करने तथा मनरेगा से विद्यालयों में खेल मैदानों के निर्माण, स्वामी विवेकानंद, उत्कृष्ट और आदर्श विद्यालयों की स्थापना आदि के बारे में भी विस्तार से बताया।

संस्कृत शिक्षा के प्रमुख शासन सचिव संजय दीक्षित ने संस्कृत शिक्षा के बारे में अवगत कराया। सर्व शिक्षा अभियान के आयुक्त जोगाराम ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में हुए गुणवत्ता प्रयासों के बारे में बताया।



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