कलेक्टर गोयल ने गोटा जरी कामगारों के साथ की चौपाल
अजमेर। अजमेर की पहचान गोटा जरी उद्योग के कामगारों के साथ जिला गौरव गोयल ने खुली चौपाल कर गोटा लूम के कॉमन फेसेलिटी सेन्टर (सीएफसी) की स्थ...
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अजमेर। अजमेर की पहचान गोटा जरी उद्योग के कामगारों के साथ जिला गौरव गोयल ने खुली चौपाल कर गोटा लूम के कॉमन फेसेलिटी सेन्टर (सीएफसी) की स्थापना के लिए लगभग 2.50 करोड़ की परियोजना को मूर्त रूप देने पर विस्तार पूर्वक चर्चा की एवं गोटा लूम का अवलोकन भी किया।गोयल ने कामगारों को बताया कि प्रस्तावित सीएफसी उत्पादन केन्द्र कम हयूमन रिचर्स डवलपमेन्ट के रूप में संचालित होगा। इस सेन्टर में गोटा लूम कामगारों द्वारा प्रयुक्त कच्चा माल जो सामान्यतः प्लास्टिक यार्न होता है का निर्माण किया जाएगा। इसके प्रारम्भ हो जाने से कामगारों को कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता युक्त कच्चा माल प्राप्त होने लगेगा। इससे कामगारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
कामगारों को परम्परागत गोटा लूम के स्थान पर नवीनतम तकनीक युक्त अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग लेने से कम समय में अधिक तथा त्राटि रहित उत्पादन किया जाना संभव होगा। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की उद्यम प्रोत्साहन निति के अन्तर्गत गोटा उद्योग को सॉफ्ट उद्यम की श्रेणी में रखा गया है। अजयमेरू गोटा जरी कलस्टर उत्पादक कम्पनी लिमिटेड को 10 प्रतिशत सहभागीता राशि क्रियान्वयन एजेंसी उद्यम प्रोत्साहन संस्थान में जमा करानी होगी। यह राशि लगभग 24 लाख रूपए बनती है। वर्तमान में इस कम्पनी के पास लगभग 18 लाख रूपए जमा है शेष लगभग 6 लाख रूपए की राशि कामगार सदस्यों को जमा करवानी होगी। केन्द्र सरकार द्वारा लगभग 2 करोड़ 17 लाख रूपए 3 किश्तों में प्रदान किए जाएंगे। प्रथम किश्त में 86 लाख 80 हजार, द्वितीय एवं तृतीय किश्त के रूप में लगभग 65- 65 लाख रूपए जारी किए जाएंगे। इस पर गोटा लूम के अध्यक्ष गोपाल खत्री ने 7 दिवस में शेष राशि जमा करवाने का विश्वास दिलाया। गोयल ने कामगार कॉलोनी में सड़क, बिजली एवं पेयजल की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागां के माध्यम से करवाएं जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कॉलोनी में पार्क विकसित करने तथा अतिक्रमण हटाने के लिए भी आश्वासन दिया।
जिला उद्योग केन्द्र के सहायक निदेशक रणवीर सिंह ने गोटा कलस्टर के बारे में अवगत कराया कि अजमेर का गोटा जरी उद्योग लगभग 90 वर्ष पूराना है। जब चेन्नई के मृदंगम् स्वामी ने यहां आकर सोने और चांदी के गोटे बनाने आरम्भ किए। कालान्तर में सोने और चांदी का स्थान तांबा तथा उसके पश्चात् मेटेलिक यार्न ने ले लिया। केन्द्र सरकार द्वारा 2006 में इस उद्योग को चिन्हित किया गया था। इस उद्योग को सरकारी स्तर पर 2010 से विशेष प्रोत्साहन दिया गया तथा कामगारों को एक स्थान पर बसाकर कलस्टर बनाकर उत्पादन एवं विपणन बढ़ाने पर जोर दिया गया। वर्तमान में गोटा निर्माण के लिए कच्ची सामग्री में रेशम का धागा कोटा से मंगवाया जाता है तथा अन्य सामग्री स्थानीय व्यापारियों से खरीदी जाती है। इससे उत्पादित माल की लागत बढ़ जाती है। सीएफसी के शुरू हो जाने से कच्चे माल की प्लास्टिक सीट से यार्न सेन्टर में ही बनेगा। इससे उत्पादन लागत कम होने से कामगारों को उचित लाभ प्राप्त होगा।
इस अवसर पर कन्हैयालाल प्रजापति सहित सीएफसी के कामगार सदस्य एवं प्रोटोकॉल ऑफिसर अनुपमा टेलर उपस्थित थे।
कामगारों को परम्परागत गोटा लूम के स्थान पर नवीनतम तकनीक युक्त अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग लेने से कम समय में अधिक तथा त्राटि रहित उत्पादन किया जाना संभव होगा। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की उद्यम प्रोत्साहन निति के अन्तर्गत गोटा उद्योग को सॉफ्ट उद्यम की श्रेणी में रखा गया है। अजयमेरू गोटा जरी कलस्टर उत्पादक कम्पनी लिमिटेड को 10 प्रतिशत सहभागीता राशि क्रियान्वयन एजेंसी उद्यम प्रोत्साहन संस्थान में जमा करानी होगी। यह राशि लगभग 24 लाख रूपए बनती है। वर्तमान में इस कम्पनी के पास लगभग 18 लाख रूपए जमा है शेष लगभग 6 लाख रूपए की राशि कामगार सदस्यों को जमा करवानी होगी। केन्द्र सरकार द्वारा लगभग 2 करोड़ 17 लाख रूपए 3 किश्तों में प्रदान किए जाएंगे। प्रथम किश्त में 86 लाख 80 हजार, द्वितीय एवं तृतीय किश्त के रूप में लगभग 65- 65 लाख रूपए जारी किए जाएंगे। इस पर गोटा लूम के अध्यक्ष गोपाल खत्री ने 7 दिवस में शेष राशि जमा करवाने का विश्वास दिलाया। गोयल ने कामगार कॉलोनी में सड़क, बिजली एवं पेयजल की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागां के माध्यम से करवाएं जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कॉलोनी में पार्क विकसित करने तथा अतिक्रमण हटाने के लिए भी आश्वासन दिया।
जिला उद्योग केन्द्र के सहायक निदेशक रणवीर सिंह ने गोटा कलस्टर के बारे में अवगत कराया कि अजमेर का गोटा जरी उद्योग लगभग 90 वर्ष पूराना है। जब चेन्नई के मृदंगम् स्वामी ने यहां आकर सोने और चांदी के गोटे बनाने आरम्भ किए। कालान्तर में सोने और चांदी का स्थान तांबा तथा उसके पश्चात् मेटेलिक यार्न ने ले लिया। केन्द्र सरकार द्वारा 2006 में इस उद्योग को चिन्हित किया गया था। इस उद्योग को सरकारी स्तर पर 2010 से विशेष प्रोत्साहन दिया गया तथा कामगारों को एक स्थान पर बसाकर कलस्टर बनाकर उत्पादन एवं विपणन बढ़ाने पर जोर दिया गया। वर्तमान में गोटा निर्माण के लिए कच्ची सामग्री में रेशम का धागा कोटा से मंगवाया जाता है तथा अन्य सामग्री स्थानीय व्यापारियों से खरीदी जाती है। इससे उत्पादित माल की लागत बढ़ जाती है। सीएफसी के शुरू हो जाने से कच्चे माल की प्लास्टिक सीट से यार्न सेन्टर में ही बनेगा। इससे उत्पादन लागत कम होने से कामगारों को उचित लाभ प्राप्त होगा।
इस अवसर पर कन्हैयालाल प्रजापति सहित सीएफसी के कामगार सदस्य एवं प्रोटोकॉल ऑफिसर अनुपमा टेलर उपस्थित थे।
