JNU छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया की जमानत पर सुनवाई आज

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नई दिल्ली। देशद्रोह के आरोपी जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। जमानत याचिका न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी सुबह साढ़े 10 बजे सुनवाई करेंगी। वहीं दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के दो छात्रों देश विरोधी नारे के आरोप में फरार पांच छात्रों में से दो ने मंगलवार देर रात को सरेंडर कर दिया। आज दोनों आरोपियों की मजिस्ट्रेट के सामने पेशी होगी। बुधवार दोपहर दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में कन्हैया की जमानत अर्जी दाखिल करने की तैयारी की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए निचली अदालत का रुख करने की सलाह दी थी। सुनवाई के मद्देनजर कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

गौरतलब है कि कल सुनवाई में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा था। कोर्ट ने पुलिस को साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट सौंपना चाहती थी।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पता होना चाहिए कि रिपोर्ट में क्या है। कोर्ट में दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच तल्खी भी साफ नज़र आई दिखी। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसटर जनरल और संजय जैन के पैरवी करने पर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने आपत्ति दर्ज़ कराई। उनका कहना है कि सरकार ने उन्हें इस मामले में वकील नियुक्त किया है इसलिए मामले की पैरवी वह करेंगे।

इससे पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के परिवार के सदस्यों ने सोमवार को उससे तिहाड जेल में मुलाकात की और उसतक उसकी मां का संदेश पहुंचाया। उसकी मां ने कहा है कि उसे न तो फिक्रमंद होना चाहिए और न ही अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए कोई स्पष्टीकरण देना चाहिए। कन्हैया के बडे भाई मणिकांत और उसके चाचा राजेंद्र सिंह ने उससे मुलाकात की एवं उसका हाल-चाल पूछा।

कन्हैया कुमार के भाई मणिकांत ने कन्हैया के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि उनका परिवार न्याय की अपनी लड़ाई को मंजिल दिलाने तक नहीं छोड़ेगा।

मणिकांत ने यह भी कहा कि कन्हैया के मामले में साफ है कि कैसे पुलिस किसी व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी सही सबूत के आरोप गढ़ सकती है, उसे गिरफ्तार कर सकती है और फिर उसे यातना दे सकती है। इस समय ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं है, जिससे हम मदद की उम्मीद करें पर फिर भी न्याय मिलने तक लड़ते रहेंगे।

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