चुनाव मैं दागियों के रिश्तेदारो को टिकट...
लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती आज राजनीति का अपराधीकरण और नैतिक मूल्यो के प्रति आस्था की कमी हैं। राजनीति उच्च मूल्यो से परिचालित एवं शुचिता...
https://khabarrn1.blogspot.com/2013/11/tickets-to-relatives-of-tainted-in-election.html
लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती आज राजनीति का अपराधीकरण और नैतिक मूल्यो के प्रति आस्था की कमी हैं। राजनीति उच्च मूल्यो से परिचालित एवं शुचिता से अनुप्राणित होनी चाहिए। महात्मा गांधी के लिए राजनीति एक जन सेवा का माध्यम थी। लेकिन आज नेताओ में जनसेवा की कोई भावना नहीं रह गई हैं। आज राजनीती में भाई-भतीजावाद, अमानवीय व्यवहार, पक्षपात ने स्थान ले लिया हैं। राजनीति में सिद्धांत का स्थान स्वार्थ और सुविधा ने ले लिया। देश कल्याण की बजाय जाति सम्प्रदाय का महत्व रह गया।
राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न दलो ने चुनावी मैदान में जो उमीदवार उतारे हैं, उनमे अधिकतर दागियो के रिश्तेदार हैं। दूसरी तरफ बरसों से पार्टी के लिए पसीना बहा रहे नेता उपेक्षित रह गए। ऐसे में नेताओ का बागी होना स्वाभाविक हैं। चुनावो में टिकिट उसे ही दिया जाना चाहिए, जो पार्टी से पहले से जुड़ा हो और पार्टी के लिए समर्पित रहा हो। इससे भारतीय राजनीति की दशा और दिशा का अनुमान लगाया जा सकता हैं। मौजूदा परिपेक्ष्य में ऎसा लगता हैं कि जब तक आपके पास पैसा नहीं हैं, तब तक आपको पार्टी का टिकट नहीं मिल सकता। चुनाव में राजनीति में जमीन से जुड़े लोगो को अवसर मिलने चाहिए। यही वजह हैं कि आम आदमी की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। दागियों के रिश्तेदारो को टिकट देने का मतलब हैं लोकतंत्र की अवेहलना करना।
पाँच राज्यो के चुनाव में दागियो का बोलबाला चल रहा हैं। दागी अपने बच्चो-पत्नी और माँ-बाप को मुखौटे लगा मैदान में उतार रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक हैं। लेकिन दागी भूल रहे हैं कि मतदाता भी कई अधिक समझदार और सूझवान हैं और वो अपना जनप्रतिनिधि चुनने में सूझबूझ से काम लेंगे। मतदाताओं को सजग रहना हैं और अपने लिए ऎसे प्रतिनिधि का चुनाव करना हैं जो सही मायनों में उनका प्रतिनिधित्व करे और आवश्यकता पड़ने पर उनकी हर सम्भव मदद करे। ऎसे लोगो को शिकस्त देनी होगी, जिन्होंने चुनाव जीतकर अपने वादे नहीं निभाए।
आज़ादी के बाद धीरे-धीरे धन कमाने की लालसा और सत्ता प्राप्त करने की होड ने सेवा और जनकल्याण की भावना को कई पीछे छोड़ दिया। आज राजनीति लोगों की सेवा करने का जरिया नहीं बल्कि धन कमाने का माध्यम बनती जा रही है। जिस तरह से किसी व्यापार को शुरू करने से पहले उसमे धन लगाकर, उससे पुनः धन अर्जित किया जाता है उसी तरह से आज राजनीती में भी धन लगाकर धन ही अर्जित किया जेन लगा है। हमे जागरूक होकर मतदान करना होगा और लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। मतदान के दिन अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट किसको दिया जाना चाहिए, इसके लिए हमे अपने क्षेत्र के उमीदवारो के बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए और इनमे से जो सबसे हो उसे वोट देना चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदाताओं को राइट टू रिजेक्ट का अधिकार भी दिया है, जिससे यदि कोई भी उम्मीदवार किसी मतदाता की नजर सही नहीं हैं तो मतदाता सभी उम्मीदवारों को 'कोई नहीं' का बटन दबाकर सभी प्रत्याशियों को नकार सकता है। देश के हर नागरिक को चाहिए कि मतदान के दिन वोटिंग बूथ पर जाकर मतदान जरुर, क्योंकि अगर आप वोट नहीं देंगे तो आप अपनी पसंद का उम्मीदवार कैसे चुन सकते हैं, इसलिए मतदान वाले दिन वोटिंग बूथ पर जाकर मतदान जरुर करे।
राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न दलो ने चुनावी मैदान में जो उमीदवार उतारे हैं, उनमे अधिकतर दागियो के रिश्तेदार हैं। दूसरी तरफ बरसों से पार्टी के लिए पसीना बहा रहे नेता उपेक्षित रह गए। ऐसे में नेताओ का बागी होना स्वाभाविक हैं। चुनावो में टिकिट उसे ही दिया जाना चाहिए, जो पार्टी से पहले से जुड़ा हो और पार्टी के लिए समर्पित रहा हो। इससे भारतीय राजनीति की दशा और दिशा का अनुमान लगाया जा सकता हैं। मौजूदा परिपेक्ष्य में ऎसा लगता हैं कि जब तक आपके पास पैसा नहीं हैं, तब तक आपको पार्टी का टिकट नहीं मिल सकता। चुनाव में राजनीति में जमीन से जुड़े लोगो को अवसर मिलने चाहिए। यही वजह हैं कि आम आदमी की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। दागियों के रिश्तेदारो को टिकट देने का मतलब हैं लोकतंत्र की अवेहलना करना।
पाँच राज्यो के चुनाव में दागियो का बोलबाला चल रहा हैं। दागी अपने बच्चो-पत्नी और माँ-बाप को मुखौटे लगा मैदान में उतार रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक हैं। लेकिन दागी भूल रहे हैं कि मतदाता भी कई अधिक समझदार और सूझवान हैं और वो अपना जनप्रतिनिधि चुनने में सूझबूझ से काम लेंगे। मतदाताओं को सजग रहना हैं और अपने लिए ऎसे प्रतिनिधि का चुनाव करना हैं जो सही मायनों में उनका प्रतिनिधित्व करे और आवश्यकता पड़ने पर उनकी हर सम्भव मदद करे। ऎसे लोगो को शिकस्त देनी होगी, जिन्होंने चुनाव जीतकर अपने वादे नहीं निभाए।
आज़ादी के बाद धीरे-धीरे धन कमाने की लालसा और सत्ता प्राप्त करने की होड ने सेवा और जनकल्याण की भावना को कई पीछे छोड़ दिया। आज राजनीति लोगों की सेवा करने का जरिया नहीं बल्कि धन कमाने का माध्यम बनती जा रही है। जिस तरह से किसी व्यापार को शुरू करने से पहले उसमे धन लगाकर, उससे पुनः धन अर्जित किया जाता है उसी तरह से आज राजनीती में भी धन लगाकर धन ही अर्जित किया जेन लगा है। हमे जागरूक होकर मतदान करना होगा और लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। मतदान के दिन अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट किसको दिया जाना चाहिए, इसके लिए हमे अपने क्षेत्र के उमीदवारो के बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए और इनमे से जो सबसे हो उसे वोट देना चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदाताओं को राइट टू रिजेक्ट का अधिकार भी दिया है, जिससे यदि कोई भी उम्मीदवार किसी मतदाता की नजर सही नहीं हैं तो मतदाता सभी उम्मीदवारों को 'कोई नहीं' का बटन दबाकर सभी प्रत्याशियों को नकार सकता है। देश के हर नागरिक को चाहिए कि मतदान के दिन वोटिंग बूथ पर जाकर मतदान जरुर, क्योंकि अगर आप वोट नहीं देंगे तो आप अपनी पसंद का उम्मीदवार कैसे चुन सकते हैं, इसलिए मतदान वाले दिन वोटिंग बूथ पर जाकर मतदान जरुर करे।
