हाईकोर्ट ने खारिज की आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका
https://khabarrn1.blogspot.com/2016/07/jodhpur-high-court-rejects-8th-bail-plea-of-asaram.html
जोधपुर। अपने ही आश्रम की एक नाबालिग लड़की से यौन दुराचार के आरोप में जोधपुर की जेल की हवा खा रहे आसाराम द्वारा बीमारी के बहाने से पेश की गई अंतरिम जमानत याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस निर्मलजीत कौर की अदालत में लम्बी सुनवाई के बाद दिए गए दिए निर्देशों के साथ ही आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई 26 जुलाई को होगी।
आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जमानत देने की पैरवी की गई थी, लेकिन पीड़िता के अधिवक्ताओं एवं सरकारी अधिवक्ता ने अंतरिम जमानत का विरोध किया, जिसके बाद आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। गौरतलब है कि आसाराम की ओर से एक बार फिर बीमारी का बहाना कर अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड में कहीं पर भी ऑपरेशन या अस्पताल में भर्ती करने की सलाह नही दी है। इसके चलते जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सेवाराम, जोधपुर के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा व गोकुलेश बोहरा ने पक्ष रखते हुए आसाराम को त्रिनाडी शूल से ग्रस्त बताते हुए अंतरिम जमानत की पैरवी की। वहीं सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अर्जुनसिंह राठौड़ और पीड़िता के अधिवक्ता आनन्द पुरोहित व पीसी सोंलकी ने बहस करते हुए विरोध किया और कहा कि जब जब चिकित्सकों ने उपचार के साथ इलाज लिखा, आरोपी आसाराम ने किसी प्रकार की दवा नहीं ली है।
आसाराम की ओर से जो उपचार के लिए दस्तावेज पेश किये वे ना तो जेल प्रशासन ने भेजे हैं न किसी ने सुझाव दिया है। स्वयं अपने ही स्तर पर एक चिकित्सक से केरला में उपचार करवाने की दस्तावेज पेश कर दिये हैं। मेडिकल बोर्ड ने भी केवल जांच के बाद ओपीडी में उपचार की सलाह दी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस कौर ने अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दी।
उल्लेखनीय है कि नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में जोधपुर जेल में बंद आसाराम की ओर से अब तक पेश किए गए सभी जमानत आवेदनों को खारिज किया जा चुका है और आसाराम की ओर से पेश किया गया जमानत हासिल करने का यह आठवां प्रयास था।
आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जमानत देने की पैरवी की गई थी, लेकिन पीड़िता के अधिवक्ताओं एवं सरकारी अधिवक्ता ने अंतरिम जमानत का विरोध किया, जिसके बाद आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। गौरतलब है कि आसाराम की ओर से एक बार फिर बीमारी का बहाना कर अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड में कहीं पर भी ऑपरेशन या अस्पताल में भर्ती करने की सलाह नही दी है। इसके चलते जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सेवाराम, जोधपुर के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा व गोकुलेश बोहरा ने पक्ष रखते हुए आसाराम को त्रिनाडी शूल से ग्रस्त बताते हुए अंतरिम जमानत की पैरवी की। वहीं सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अर्जुनसिंह राठौड़ और पीड़िता के अधिवक्ता आनन्द पुरोहित व पीसी सोंलकी ने बहस करते हुए विरोध किया और कहा कि जब जब चिकित्सकों ने उपचार के साथ इलाज लिखा, आरोपी आसाराम ने किसी प्रकार की दवा नहीं ली है।
आसाराम की ओर से जो उपचार के लिए दस्तावेज पेश किये वे ना तो जेल प्रशासन ने भेजे हैं न किसी ने सुझाव दिया है। स्वयं अपने ही स्तर पर एक चिकित्सक से केरला में उपचार करवाने की दस्तावेज पेश कर दिये हैं। मेडिकल बोर्ड ने भी केवल जांच के बाद ओपीडी में उपचार की सलाह दी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस कौर ने अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दी।
उल्लेखनीय है कि नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में जोधपुर जेल में बंद आसाराम की ओर से अब तक पेश किए गए सभी जमानत आवेदनों को खारिज किया जा चुका है और आसाराम की ओर से पेश किया गया जमानत हासिल करने का यह आठवां प्रयास था।
