जेडीए की कनक वृंदावन रोप-वे परियोजना ठंडे बस्ते में, नई पर कवायद शुरू

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जयपुर। सामोद पहाड़ी पर स्थित वीर हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले विकलांग एवं वृद्ध श्रद्धालुओं को सुविधा मुहैया कराने के लिए विधायक रामलाल शर्मा की पहल पर जेडीए की ओर से एक ओर यहां रोप-वे परियोजना की कवायद की जा रही है, लेकिन करीब 3 साल पहली बनाई गई कनक वृंदावन रोप-वे परियोजना पर अभी भी कोई खास कार्यवाही नहीं हो सकी है।

वन विभाग की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद से कनक वृंदावन रोप-वे परियोजना ठंडे बस्ते में चल रही है, जिस पर वन विभाग की ओर से फाइनल अप्रुवल आने का अभी तक भी इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में जेडीए के द्वारा पुरानी परियोजना को भूलकर नई परियोजना की कवायद शुरू करना हस्याद्पद लगता है।

साल 2012 में बनाई गई कनक घाटी रोप-वे परियोजना, जिसमें नाहरगढ़ पहाड़ी से कनक वृंदावन तक रोप-वे शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लंबे समय से अटकी पड़ी है। वन विभाग की ओर से इस परियोजना को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के बाद इस योजना पर ग्रहण लग गया और तभी से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।

इस बारे में जेडीए में इस परियोजना के प्रोजेक्ट अभियंता संजीव कुमार जैन ने बताया कि वन विभाग की आपत्ति के चलते यह योजना अटकी हुई है, जिस अभी फाइनल अप्रूवल आना बाकि है। इस बारे में कई बार प्रपोजल भेजा जा चुका है, लेकिन अभी अप्रूवल नहीं मिल पाने की वजह से इस परियोजना पर कार्यवाही नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वन विभाग को एक बार फिर से लिखा जाएगा और कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाएगा।

कब-कब क्या हुआ?

  • 29 दिसंबर, 2005 : जयपुर कलेक्टर से बीओटी के आधार पर कनक वृंदावन से जयगढ़ रोड तक रोप-वे कार्य की अनुमति मांगी।
  • 10 जनवरी, 2006 : कलेक्टर ने रोप-वे निर्माण की स्वीकृति दी।
  • 21 जनवरी, 2006 : जेडीए ने मैसर्स दामोदर रोप-वे कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रा.लि. को कार्यादेश दिया।
  • 8 मई, 2006 : फर्म ने वन विभाग से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए आवश्यक सर्वे की अनुमति मांगी।
  • 10 मई, 2006 : प्रधान वन संरक्षक ने सर्वे के लिए भारत सरकार ने अनुमति लेने को कहा।
  • 18 मई, 2006: वन विभाग को सारी जानकारी दी, फिर से सवेज़् की अनुमति फिर मांगी गई।
  • 27 अगस्त,2008: उप वन संरक्षक ने सर्वे की अनुमति प्रदान की।
  • 3 सितंबर, 2009 : वन विभाग के निर्देशानुसार सर्वे करवाकर रिपोर्ट उन्हें भेजी।
  • 14 फरवरी, 2011 : राष्ट्रीय वन्यजीव मंडल की स्टेंडिंग कमेटी की 21वीं बैठक में रोप-वे निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • 21 फरवरी, 2012 : सुप्रीम कोर्ट ने अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए वन विभाग को आवेदन करने के लिए निर्देशित किया।
  • 23 जुलाई, 2012 : पुन: सर्वे करवा कर प्रस्ताव वन विभाग को भेजा।
  • 25 नवंबर, 2013 : 1.51 हेक्टेयर वन भूमि के प्रत्यावर्तन के लिए प्रस्ताव वन विभाग को भिजवाया।
  • 9 सितंबर, 2014 : वन विभाग की ओर से जो सूचनाएं और मांगी गई जानकारी भेजी गई। इसके बाद से मामला उनके पास विचाराधीन है।

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