मंदिर में मातम : पत्थर भी पसीज जाएंगे इस बेबस मां की दास्तां सुनकर
https://khabarrn1.blogspot.com/2016/04/stone-heart-person-will-also-cry-after-listen-this-mother-story.html
कोल्लम। केरल के कोल्लम जिले कल हुए हादसे में मरने वाली संख्या जहां 110 तक पहुंच चुकी है, वहीं अस्पताल में भर्ती घायल भी जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। अस्पताल में भर्ती घायलों में कई बच्चे भी शामिल हैं और इन्हीं में से एक बच्चे की हालत काफी गंभीर गनी हुई है। इस बच्चे की मां यहां बेबस हाल में अपने बच्चे के ठीक होकर घर लोटने के लिए टिकटिकी लगाए हुए है।
पुट्टिंगल देवी मंदिर में हुए विस्फोट और आग का शिकार होकर मरने वालों के परिजनों की हालत ऐसी हो गई है, जैसे उन पर कोई बहुत बड़ा पहाड़ टूट पड़ा हो। वहीं अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके परिजनों की हालत को देखकर किसी पत्थर का भी दिल पसीच जाए।
पुतिंगल मंदिर हादसे में घायल होने वालों में में से एक है, महज 14 साल का शाबिर, जो इस वक्त तिरुवनंतपुरम मेडिकल अस्पताल के बर्न्स आईसीयू में भर्ती है। शाबिर बुरी तरह से झुलस चुका है आैर उसका पूरा मुंह पट्टियों से बंधा हुआ है, उसके शरीर के कई हिस्सों पर भी पट्टियां लगी हैं। वहीं शाबिर की मां शकुंतला का रो रो कर बुरा हाल है। शकुंतला का पति उसे इस दुनिया में अकेला छोड़कर पहले ही जा चुका है आैर अब वह मेहनत—मजदूरी करके अपने बेटे को पाल रही है और उसे पढ़ा भी रही है।
शकुंतला ने बताया कि रविवार सुबह जब हादसा हुआ तब वह अपने घर पर ही थी और उसका बेटा शाबिर मंदिर की छत पर था। शाबिर वहां खड़ा होकर आतिशबाजी देखकर खुश हो रहा था, तभी वहां एक विस्फोट हुआ, जिसने सारी खुशियों को मातम में तब्दील करके रख दिया। अपने बेटे को जगह—जगह से जला हुआ देखकर मानो शकुंतला के प्राण निकल गए हो।
अस्पताल में अपने बेटे को पट्टियों में लिपटा देखकर शकुंतला रोती हुई कहती है कि, ¨मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं। आखिर, मैं कैसे अपने बेटे का ईलाज करा पाउंगी। अस्पताल में इतने घायल लोग भर्ती है, जिन्हें संभालने के लिए डाक्टरों की संख्या भी कम पड़ रही है, आखिर कैसे अपने बच्चे का इलाज करा पाउंगी। पता नहीं मेरा बेटा अब फिर से स्कूल भी जा पाएगा कि नहीं।¨
गौरतलब है कि यहां घायल हुए 300 से ज्यादा लोगों में से करीब 100 लोगों को तिरुवनंतपुरम मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से गंभीर रूप से झुलस चुके घायलों को बर्न वार्ड में वार्ड में रखा गया है, जिनमें से भी बहुत ज्यादा जल चुके घायलों को बर्न्स आईसीयू में शिफट किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक आईसीयू में शाबिर के साथ भर्ती 8 लोगों में से ज्यादातर के शरीर 90 फीसदी से ज्यादा जल गए हैं, जिससे इनके हालत बहुत नाजुक बनी हुई है।
पुट्टिंगल देवी मंदिर में हुए विस्फोट और आग का शिकार होकर मरने वालों के परिजनों की हालत ऐसी हो गई है, जैसे उन पर कोई बहुत बड़ा पहाड़ टूट पड़ा हो। वहीं अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके परिजनों की हालत को देखकर किसी पत्थर का भी दिल पसीच जाए।
पुतिंगल मंदिर हादसे में घायल होने वालों में में से एक है, महज 14 साल का शाबिर, जो इस वक्त तिरुवनंतपुरम मेडिकल अस्पताल के बर्न्स आईसीयू में भर्ती है। शाबिर बुरी तरह से झुलस चुका है आैर उसका पूरा मुंह पट्टियों से बंधा हुआ है, उसके शरीर के कई हिस्सों पर भी पट्टियां लगी हैं। वहीं शाबिर की मां शकुंतला का रो रो कर बुरा हाल है। शकुंतला का पति उसे इस दुनिया में अकेला छोड़कर पहले ही जा चुका है आैर अब वह मेहनत—मजदूरी करके अपने बेटे को पाल रही है और उसे पढ़ा भी रही है।
शकुंतला ने बताया कि रविवार सुबह जब हादसा हुआ तब वह अपने घर पर ही थी और उसका बेटा शाबिर मंदिर की छत पर था। शाबिर वहां खड़ा होकर आतिशबाजी देखकर खुश हो रहा था, तभी वहां एक विस्फोट हुआ, जिसने सारी खुशियों को मातम में तब्दील करके रख दिया। अपने बेटे को जगह—जगह से जला हुआ देखकर मानो शकुंतला के प्राण निकल गए हो।
अस्पताल में अपने बेटे को पट्टियों में लिपटा देखकर शकुंतला रोती हुई कहती है कि, ¨मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं। आखिर, मैं कैसे अपने बेटे का ईलाज करा पाउंगी। अस्पताल में इतने घायल लोग भर्ती है, जिन्हें संभालने के लिए डाक्टरों की संख्या भी कम पड़ रही है, आखिर कैसे अपने बच्चे का इलाज करा पाउंगी। पता नहीं मेरा बेटा अब फिर से स्कूल भी जा पाएगा कि नहीं।¨
गौरतलब है कि यहां घायल हुए 300 से ज्यादा लोगों में से करीब 100 लोगों को तिरुवनंतपुरम मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से गंभीर रूप से झुलस चुके घायलों को बर्न वार्ड में वार्ड में रखा गया है, जिनमें से भी बहुत ज्यादा जल चुके घायलों को बर्न्स आईसीयू में शिफट किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक आईसीयू में शाबिर के साथ भर्ती 8 लोगों में से ज्यादातर के शरीर 90 फीसदी से ज्यादा जल गए हैं, जिससे इनके हालत बहुत नाजुक बनी हुई है।