बेलगाम जारी है घरेलू गैस सिलेण्डर का व्यवसायिक उपयोग
बालोतरा (भगाराम पंवार)। औद्योगिक क्षेत्र बालोतरा सहित उपखण्ड क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेण्डरों का व्यावसायिक कार्यों में प्रयोग रूकने का ...
https://khabarrn1.blogspot.com/2014/04/commercial-use-of-domestic-gas-cylinder-is-continues-licentious.html
बालोतरा (भगाराम पंवार)। औद्योगिक क्षेत्र बालोतरा सहित उपखण्ड क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेण्डरों का व्यावसायिक कार्यों में प्रयोग रूकने का नाम नही ले रहा है। शहर के चाय की थड़ियों, होटल-रेस्टोरेंट, गर्म नमकीन की दुकानों व ठेला संचालक अपने फायदे के लिए बिना किसी के डर से घरेलू गैस सिलेण्डरों का उपयोग कर रहे हैं। गैस सिलेण्डर पर दिए जाने वाले सरकारी अनूदान को लेकर सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।
संबंधित अधिकारी इस बात से भली भांति अवगत है, लेकिन कार्यवाही के नाम पर महज कभी कभार कार्यवाही करते है। इन्होंने कार्रवाई के नाम पर चुप्पी धारण कर रखी है। शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी घरेलू गैस सिलेण्डरों का उपयोग धडल्ले से हो रहा है। किसी तरह की कार्यवाही नहीं होने से होटल, रेस्टोरेंट, गर्म नमकीन की दुकानों व ठेला संचालको में किसी तरह का डर नहीं है। वे अपनी दुकानो के बाहर खुलआम घरेलू गैस सिलेण्डरों को रखकर इनका उपयोग करते हैं।
कुछ उपभोक्ता सोचते हैं अपना फायदा- एक उपभोक्ताओं को भारत सरकार ने प्रतिवर्ष 12 घरेलू गैस सिलेण्डर अनुदान राशि से उपलब्ध करवाए जाते हैं। कई परिवारों में सालभर में 5-6 सिलेण्डर की ही जरूरत रहती है। शेष बचे सब्सिडी वाले सिलेण्डरों को वे उपभोक्ता बाजार में करीब 600-700 रुपए में बेच देते हैं और अपना फायदा सोचते हैं और घरेलू गैस सिलेण्डरों की कालाबाजारी से प्रति सिलेण्डर 200-300 रुपए कमाते हैं।
छोटे से फायदे का यही लालच घरेलू गैस सिलैण्डर की कालाबाजारी का बढ़ावा देता है, जिससे किसी जरूरतमंद की जरूरत या तो पूरी ही नहीं हो पाती है या फिर उसे इसके लिए मजबूर होकर ज्यादा दाम देने पड़ते हैं।
संबंधित अधिकारी इस बात से भली भांति अवगत है, लेकिन कार्यवाही के नाम पर महज कभी कभार कार्यवाही करते है। इन्होंने कार्रवाई के नाम पर चुप्पी धारण कर रखी है। शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी घरेलू गैस सिलेण्डरों का उपयोग धडल्ले से हो रहा है। किसी तरह की कार्यवाही नहीं होने से होटल, रेस्टोरेंट, गर्म नमकीन की दुकानों व ठेला संचालको में किसी तरह का डर नहीं है। वे अपनी दुकानो के बाहर खुलआम घरेलू गैस सिलेण्डरों को रखकर इनका उपयोग करते हैं।
कुछ उपभोक्ता सोचते हैं अपना फायदा- एक उपभोक्ताओं को भारत सरकार ने प्रतिवर्ष 12 घरेलू गैस सिलेण्डर अनुदान राशि से उपलब्ध करवाए जाते हैं। कई परिवारों में सालभर में 5-6 सिलेण्डर की ही जरूरत रहती है। शेष बचे सब्सिडी वाले सिलेण्डरों को वे उपभोक्ता बाजार में करीब 600-700 रुपए में बेच देते हैं और अपना फायदा सोचते हैं और घरेलू गैस सिलेण्डरों की कालाबाजारी से प्रति सिलेण्डर 200-300 रुपए कमाते हैं।
छोटे से फायदे का यही लालच घरेलू गैस सिलैण्डर की कालाबाजारी का बढ़ावा देता है, जिससे किसी जरूरतमंद की जरूरत या तो पूरी ही नहीं हो पाती है या फिर उसे इसके लिए मजबूर होकर ज्यादा दाम देने पड़ते हैं।
