प्रशासन सुस्त, अवैध खनन माफिया चुस्त
बिजौलिया (जगदीश सोनी)। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए उच्च न्यायालय व राज्य सरकार ने भले ही संबंधित विभागों को सख्त कार्यवाही के आदेश द...
https://khabarrn1.blogspot.com/2014/06/illegal-mining-mafia-active-because-of-lazy-administration.html
बिजौलिया (जगदीश सोनी)। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए उच्च न्यायालय व राज्य सरकार ने भले ही संबंधित विभागों को सख्त कार्यवाही के आदेश दे रखे हो, लेकिन इन आदेशों की धज्जियां उड़ाने में राजस्व, खनिज व वन विभाग के आला अधिकारियों के साथ ही स्थानीय व जिला प्रशासन ने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखी है।
मात्र दिखावे के लिए कभी-कभार अवैध खनन के मामले बनाकर सरकारी महकमें ये साबित करने का प्रयास करते हैं कि अवैध खनन पर कार्यवाही करने के लिए ये हमेशा मुस्तैद रहते हैं। लेकिन ऊपरमाल क्षेत्र में वर्षों से खान माफियाओं द्वारा बेखौफ हो कर वन क्षेत्र,चरागाह,नदियों व हाई टेंशन लाईनों के नीचे तथा नहरों को तोड़ कर किया जा रहा अवैध खनन सरकारी महकमों की पोल खोलने व इनकी मिली भगत की कहानी बयां करने के लिए काफी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपखण्ड क्षेत्र के सुखपुरा चरागाह, आट चरागाह, नला का माताजी वन क्षेत्र, कांस्या, तिलस्वां, काटबड़ा, चम्पापुर, भूती व उदपुरिया समेत कई स्थानों पर धड़ल्लें से अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चित नला का माताजी वन क्षेत्र है, जहां दिन में तो सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन रात होते ही बड़ी लाइटों की रोशनी में बेखौफ होकर अवैध खनन के कारोबार को अंजाम दिया जाता है। यहां हो रहे अवैध खनन में विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी को लेकर भी लोगों में चर्चा-ए-आम है।
वहीं दूसरी ओर तिलस्वां से लगा कर राणा जी का गुढ़ा तक ऐरू नदी में व इसके किनारों पर किए जा रहे अवैध खनन ने तो नदी का प्राकृतिक स्वरूप ही बिगाड़ कर रख दिया है। जबकि राजस्थान हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर दिए फैसले में ऐरू नदी के संरक्षण व अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए विशेष आदेश जारी किए हुए है।
क्षेत्र के कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों व मीडिया द्वारा अब तक सैकड़ों बार अवैध खनन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि हूकुमतें हो या न्याय पालिका, माफियाओं व भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ के आगे सभी बेबस दिखाई देते हैं।
मात्र दिखावे के लिए कभी-कभार अवैध खनन के मामले बनाकर सरकारी महकमें ये साबित करने का प्रयास करते हैं कि अवैध खनन पर कार्यवाही करने के लिए ये हमेशा मुस्तैद रहते हैं। लेकिन ऊपरमाल क्षेत्र में वर्षों से खान माफियाओं द्वारा बेखौफ हो कर वन क्षेत्र,चरागाह,नदियों व हाई टेंशन लाईनों के नीचे तथा नहरों को तोड़ कर किया जा रहा अवैध खनन सरकारी महकमों की पोल खोलने व इनकी मिली भगत की कहानी बयां करने के लिए काफी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपखण्ड क्षेत्र के सुखपुरा चरागाह, आट चरागाह, नला का माताजी वन क्षेत्र, कांस्या, तिलस्वां, काटबड़ा, चम्पापुर, भूती व उदपुरिया समेत कई स्थानों पर धड़ल्लें से अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चित नला का माताजी वन क्षेत्र है, जहां दिन में तो सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन रात होते ही बड़ी लाइटों की रोशनी में बेखौफ होकर अवैध खनन के कारोबार को अंजाम दिया जाता है। यहां हो रहे अवैध खनन में विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी को लेकर भी लोगों में चर्चा-ए-आम है।
वहीं दूसरी ओर तिलस्वां से लगा कर राणा जी का गुढ़ा तक ऐरू नदी में व इसके किनारों पर किए जा रहे अवैध खनन ने तो नदी का प्राकृतिक स्वरूप ही बिगाड़ कर रख दिया है। जबकि राजस्थान हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर दिए फैसले में ऐरू नदी के संरक्षण व अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए विशेष आदेश जारी किए हुए है।
क्षेत्र के कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों व मीडिया द्वारा अब तक सैकड़ों बार अवैध खनन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि हूकुमतें हो या न्याय पालिका, माफियाओं व भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ के आगे सभी बेबस दिखाई देते हैं।